CBSE में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए केंद्र सरकार ने प्रशांत लोखंडे को नया चेयरमैन नियुक्त किया है। वे राहुल सिंह की जगह लेंगे, जिनका मंगलवार को तबादला कर कृषि मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद और सवाल उठ रहे हैं।
CBSE को मिला नया चेयरमैन
केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए प्रशांत लोखंडे को नया चेयरमैन नियुक्त किया है।
मंगलवार को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी है। प्रशांत लोखंडे ने राहुल सिंह की जगह ली है, जिनका उसी दिन तबादला कर दिया गया।
कौन हैं प्रशांत लोखंडे?
प्रशांत सीताराम लोखंडे (Prashant Sitaram Lokhande) भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 2001 बैच के अधिकारी हैं।
वे AGMUT (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम-यूनियन टेरिटरीज) कैडर से संबंधित हैं। CBSE में नियुक्ति से पहले वे केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे।
हाल के वर्षों में उनका प्रशासनिक कार्यकाल मुख्य रूप से गृह मंत्रालय में रहा है। वर्ष 2022 में उन्हें गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव नियुक्त किया गया था और बाद में पदोन्नत कर अतिरिक्त सचिव बनाया गया।
राहुल सिंह का हुआ तबादला
CBSE के पूर्व चेयरमैन राहुल सिंह का तबादला कर उन्हें कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है।
राहुल सिंह बिहार कैडर के 1996 बैच के IAS अधिकारी हैं और उन्होंने CBSE में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई थीं।
OSM विवाद के बीच हुआ बदलाव
CBSE में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर देशभर में बहस जारी है।
हाल के महीनों में कई छात्रों, अभिभावकों और छात्र संगठनों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित तकनीकी खामियों और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की जा चुकी है।
हालांकि सरकार की ओर से जारी आदेश में नियुक्ति और तबादले को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
शिक्षा क्षेत्र की नजर नए चेयरमैन पर
प्रशांत लोखंडे के सामने अब CBSE की परीक्षाओं, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, छात्र शिकायत निवारण और शैक्षणिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि OSM विवाद और बोर्ड परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।








