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उर्दू और संस्कृत में कौन-सी भाषा पुरानी है ? Javed Akhtar’s views। Jaipur Literature Festival 2026

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Saturday, January 17, 2026 2:40 PM

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Javed Akhtar’s views : मशहूर गीतकार, कवि और लेखक जावेद अख्तर ने Jaipur Literature Festival 2026 में आयोजित एक सार्वजनिक सत्र के दौरान भाषा, संस्कृति, परिवार और हिंदी सिनेमा में आए बदलावों पर खुलकर बात की। कार्यक्रम के दौरान उनसे पूछे गए एक सवाल ने पूरे सभागार का ध्यान खींच लिया  “उर्दू और संस्कृत में कौन-सी भाषा पुरानी है?”

इस पर Javed Akhtar  ने हल्के आश्चर्य के साथ जवाब दिया,

“आपने मुझसे कैसा सवाल पूछ लिया?”

उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृत दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी जीवित भाषा है, जबकि उर्दू उसकी ‘छोटी बहन’ है, जो हजार साल से भी पुरानी नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि तुलना करनी ही थी, तो लैटिन और ग्रीक जैसी भाषाओं पर सवाल अधिक तर्कसंगत होता।Javed Akhtar’s views

तमिल को बताया दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषा

अख्तर ने मंच से यह भी कहा कि तमिल को दुनिया की सबसे पुरानी जीवित भाषा माना जाता है, जबकि संस्कृत उसके बाद आती है। उनके अनुसार भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कृति की पहचान होती है।

मां की यादों से जुड़ी भाषा की समझ

जब उनसे उनकी मां के बारे में पूछा गया तो उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा,

“इस उम्र में मुझे अपनी पोती की बात करनी चाहिए।”

लेकिन इसके बाद उन्होंने बताया कि उनकी मां का निधन उनके आठवें जन्मदिन के अगले ही दिन हो गया था, और वही पांच साल उनके जीवन के सबसे निर्णायक वर्ष थे।उन्होंने बताया कि उनकी मां उन्हें शब्दों से खेलने की आदत डालती थीं, कहानियां सुनाती थीं और किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं।

“यहीं से भाषा में मेरी रुचि पैदा हुई,” उन्होंने कहा।

उन्होंने हँसते हुए जोड़ा, “मुझे यकीन है कि मेरी मां उपन्यासों के रोमांटिक हिस्से एडिट कर देती थीं।”

विरासत से डर नहीं, आत्म-विकास जरूरी

अपने साहित्यिक परिवार पर बोलते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि विरासत से डरना नहीं चाहिए।

“अगर आप दूसरों से तुलना करेंगे तो घबराएंगे, लेकिन अगर खुद से बेहतर बनने की सोचेंगे तो आगे बढ़ेंगे।”

उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि प्रतिस्पर्धा दूसरों से नहीं, स्वयं से करें।

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फिल्म इंडस्ट्री को लेकर उन्होंने कहा कि हर दौर को लोग “गोल्डन एरा” कह देते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि समय के साथ कला और समाज दोनों बदलते हैं।

उन्होंने कहा,“आज के असिस्टेंट डायरेक्टर सितारों को नाम से बुलाते हैं, हमारे समय में ऐसा सोचना भी मुश्किल था।”

उनके अनुसार, सिनेमा में आए बदलाव समाज के बदलते मूल्यों और लोअर मिडिल क्लास एस्थेटिक्स के उभार का प्रतिबिंब हैं।

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सेक्युलरिज़्म पर Javed Akhtar’s views

धर्मनिरपेक्षता को लेकर उन्होंने कहा कि यह कोई सिखाई जाने वाली चीज नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।उन्होंने अपने बचपन का किस्सा सुनाते हुए बताया कि उनकी दादी ने एक बार उनके दादा को धार्मिक पाठ याद कराने के बदले पैसे देने से मना कर दिया था।

“वहीं मेरी धार्मिक शिक्षा खत्म हो गई,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

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