Deputy CM बनने से क्यों पीछे हटे निशांत कुमार? बिहार में मची सियासी हलचल

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Thursday, April 16, 2026 9:21 AM

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बिहार की राजनीति में हाल ही में हुए बड़े बदलावों के बीच एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने राज्य के डिप्टी सीएम पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में नई सरकार का गठन हुआ है और सत्ता संतुलन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।

ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, जेडीयू नेतृत्व ने निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। बताया गया है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वे अभी इस जिम्मेदारी के लिए खुद को तैयार नहीं मानते।

अनुभव की कमी और जमीनी राजनीति पर फोकस

सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार का मानना है कि उन्हें पहले संगठन और जमीनी स्तर पर काम करने का अनुभव हासिल करना चाहिए। यही कारण है कि उन्होंने सत्ता के बड़े पद के बजाय जनता के बीच काम करने को प्राथमिकता दी।

हाल ही में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि वे जल्दबाजी में बड़ा पद लेने के बजाय धीरे-धीरे राजनीतिक अनुभव जुटाना चाहते हैं।

Deputy CM बनने से क्यों पीछे हटे निशांत कुमार? बिहार में मची सियासी हलचल

नई सरकार और बदला समीकरण

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं। भाजपा नेता सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने हैं, जबकि डिप्टी सीएम पद पर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।

इस घटनाक्रम के बीच निशांत कुमार को लेकर काफी अटकलें लगाई जा रही थीं। कुछ जगहों पर उन्हें भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में भी पेश किया गया था, लेकिन उनके इस फैसले ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया।

परिवारवाद से दूरी का संकेत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला जेडीयू की छवि को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी परिवारवाद से दूर रहकर काम करना चाहती है।

आगे क्या?

निशांत कुमार के इस कदम को उनके राजनीतिक करियर की एक रणनीतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। वे आने वाले समय में संगठन में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं और भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी संभालने की संभावनाएं भी बनी हुई हैं।

कुल मिलाकर, डिप्टी सीएम पद को ठुकराने का यह फैसला बिहार की राजनीति में नई बहस और संभावनाओं को जन्म दे रहा है।

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