Ramadan 2026 का दूसरा अशरा शुरू, जानिए तीनों अशरों की दुआ और उनका सही मतलब

रमज़ान 2026 का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। जानिए दूसरे अशरे की दुआ, पहले और तीसरे अशरे की दुआ, उनका मतलब और इस दौरान क्या पढ़ना चाहिए। पूरी जानकारी पढ़ें।

Shabana Parveen

Administrator | Updated: 01 Mar 2026, 08:26 PM IST | 1 min read
Ramadan 2026 का दूसरा अशरा शुरू, जानिए तीनों अशरों की दुआ और उनका सही मतलब
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Ramadan का मुकद्दस महीना जारी है और अब इसका दूसरा अशरा शुरू हो चुका है। भारत में इस साल रमज़ान की शुरुआत 19 फरवरी 2026 से हुई थी, जो चांद दिखने के बाद तय होती है। अब रमज़ान के 11वें रोजे से दूसरा अशरा शुरू हो जाता है, जिसे मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का वक़्त माना जाता है।

इस्लामिक के मुताबिक रमज़ान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत का और तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का होता है। दूसरे अशरे में मुसलमान अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और ज्यादा से ज्यादा इबादत करते हैं।

दूसरे अशरे की दुआ

                            “अस्तग़्फिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन वा अतूबु इलैहि”

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                                   “استغفر اللہ ربی من کُلّ ثمبین و اتوب الٰہی”
मतलब :  मैं अल्लाह से अपने सभी गुनाहों की माफी मांगता हूं और उसकी तरफ लौटता हूं।

तीनों अशरों की दुआ

पहला अशरा (रहमत )

पहला अशरा रहमत का होता है, पहले अशरे की दुआ
                                                  “रब्बिग़फिर वरहम व अंता खैरुर्राहिमीन”

                                                        “رَبِّغْفِرْ وَرَحْمَ وَ انت خیر الرحمٰن”

मतलब : ऐ मेरे रब ! मुझे माफ़ कर दे और मुझ पर रहम फरमा, तू ही सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

दूसरा अशरा (मगफिरत):

दूसरा अशरा मगफिरत (माफ़ी) का होता है,  दुसरे अशरे की दुआ

                                 “अस्तग़्फिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन वा अतूबु इलैहि”

                                        “استغفر اللہ ربی من کُلّ ثمبین و اتوب الٰہی”

मतलब :  मैं अल्लाह से अपने सभी गुनाहों की माफी मांगता हूं और उसकी तरफ लौटता हूं।

तीसरा अशरा (निजात):

तीसरा अशरा जहन्नुम से निजात का होता है, तीसरे अशरे की दुआ

                                                     “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन्नार”

                                                              “اللہم اجیرنی منار”

मतलब : ऐ अल्लाह मुझे जहन्नुम की आग से बचा।

रमज़ान का हर अशरा इंसान को बेहतर बनने और अल्लाह के करीब आने का मौका देता है। इस दौरान दुआ, नमाज और नेक काम करने से इंसान को सवाब मिलता है और गुनाह माफ होते हैं।

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