महाकुंभ के दौरान साध्वी के रूप में सामने आकर देशभर में चर्चा का विषय बनीं हर्षा रिछारिया एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही उनकी नई प्रतिक्रिया ने धार्मिक और सामाजिक बहस को फिर से हवा दे दी है।
हर्षा रिछारिया ने साफ शब्दों में कहा है,
“मैं कोई मां सीता नहीं हूं कि अग्नि परीक्षा दूं। आप अपना धर्म अपने पास रखिए।”
उनका यह बयान उन लोगों के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है जो बीते एक साल से उनके धर्म से जुड़ने के फैसले पर सवाल उठा रहे थे।
Also Read
महाकुंभ से मिली पहचान, फिर शुरू हुआ विरोध
महाकुंभ के दौरान आचार्य महामंडलेश्वर की शिष्या के रूप में सामने आने के बाद हर्षा रिछारिया को जबरदस्त लोकप्रियता मिली थी। हालांकि, इसके साथ ही उन्हें आलोचनाओं और आरोपों का भी सामना करना पड़ा। लोगों ने यह तक कहना शुरू कर दिया कि वह पैसे और प्रसिद्धि के लिए धर्म के मार्ग पर आई हैं।
Read Today's E-Magazine
Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.
“धर्म में आने के बाद सब कुछ खो दिया”
अपने बयान में हर्षा ने भावुक होते हुए कहा कि धर्म में आने से पहले वह एक ब्लॉगर के तौर पर अच्छा-खासा पैसा कमा रही थीं।
उन्होंने कहा,
“जब मैं धर्म में आई, तब से मेरे पास उधारी के अलावा कुछ नहीं बचा। न पैसा, न सुकून।”
उनका कहना है कि वह सच्चे मन से धार्मिक मार्ग पर चलना चाहती थीं, लेकिन बार-बार रोके जाने, शक और आलोचनाओं ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया।
धर्म मार्ग छोड़ने के संकेत
लगातार विरोध और सामाजिक दबाव के बाद अब हर्षा रिछारिया ने यह संकेत दिया है कि वह धर्म के इस रास्ते को छोड़ने पर विचार कर रही हैं।
उनका यह बयान इस सवाल को जन्म देता है कि क्या आज के दौर में धर्म, आस्था और सोशल मीडिया एक साथ चल सकते हैं?



