अमेरिका में भारतीय नागरिक को 30 महीने की जेल, रूस को भेजे जा रहे थे विमानन उपकरण
अमेरिका की एक संघीय अदालत ने भारत के एक 58 वर्षीय नागरिक को रूस को अवैध रूप से विमानन उपकरण निर्यात करने की साजिश रचने के मामले में ढाई साल की सजा सुनाई है। दोषी ठहराए गए व्यक्ति की पहचान दिल्ली निवासी संजय कौशिक के रूप में हुई है।
Also Read
ओरेगन जिले के अमेरिकी अटॉर्नी स्कॉट ब्रैडफोर्ड ने फैसले के दौरान कहा कि यह एक सोची-समझी और मुनाफे के लिए की गई साजिश थी, जिसमें कई बार लेन-देन किए गए और विदेशी सहयोगियों के साथ समन्वय किया गया। इनमें रूस से जुड़ी प्रतिबंधित संस्थाएं भी शामिल थीं।
Read Today's E-Magazine
Swipe through the complete digital edition of Urjanchal Tiger right on your screen.
उन्होंने कहा, “आरोपी ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े नियमों को जानबूझकर कमजोर करने की कोशिश की। यह केवल कानून उल्लंघन नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा खतरा था।”
रूस भेजे जा रहे थे सैन्य उपयोग वाले उपकरण
अदालत के अनुसार, संजय कौशिक को 30 महीने की संघीय जेल और 36 महीने की निगरानी (Supervised Release) की सजा दी गई है। यह सजा अमेरिका के Export Control Reform Act के उल्लंघन के तहत दी गई।
जांच में सामने आया कि वर्ष 2023 के सितंबर से कौशिक और उसके सहयोगी अमेरिका से ऐसे एयरोस्पेस उपकरण खरीद रहे थे, जिनका उपयोग सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल था Attitude and Heading Reference System (AHRS) यह सिस्टम विमान की दिशा, गति और नेविगेशन कंट्रोल के लिए उपयोग किया जाता है।
फर्जी दस्तावेज़ों से हासिल किया गया लाइसेंस
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, इन उपकरणों को भारत में स्थित कौशिक की कंपनी के नाम पर खरीदा गया था। दस्तावेज़ों में दावा किया गया कि इनका उपयोग नागरिक हेलीकॉप्टर में किया जाएगा, जबकि असल में इन्हें रूस भेजने की योजना थी।
AHRS जैसे उपकरणों के निर्यात के लिए अमेरिकी वाणिज्य विभाग से विशेष अनुमति जरूरी होती है, खासकर रूस जैसे प्रतिबंधित देशों के लिए।
मियामी से गिरफ्तारी, फिर अदालत में दोष स्वीकार
संजय कौशिक को अक्टूबर 2024 में मियामी से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पोर्टलैंड की फेडरल ग्रैंड जूरी ने उस पर साजिश रचने, अवैध निर्यात का प्रयास, झूठे बयान देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। अक्टूबर 2025 में कौशिक ने अदालत में दोष स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अब उसे सजा सुनाई गई है।
अमेरिका की सख्त चेतावनी
अमेरिकी न्याय विभाग के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभाग के प्रमुख जॉन आइजनबर्ग ने कहा, “जो भी व्यक्ति अमेरिकी निर्यात कानूनों को तोड़कर सैन्य उपयोग वाली तकनीक दूसरे देशों को भेजने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
क्यों है यह मामला अहम?
- रूस पर पहले से ही कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लागू हैं
- सैन्य उपयोग वाली तकनीक का अवैध निर्यात वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा
- अमेरिका भारत से जुड़े मामलों पर भी कड़ी नजर रख रहा है
- आने वाले समय में ऐसे मामलों में सजा और सख्त हो सकती है



