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Obsession Movie Review : जब प्यार की ख्वाहिश बन जाती है डरावना अभिशाप….

By: Neeraj Sahu

On: Sunday, May 31, 2026 7:53 AM

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निर्देशक करी बार्कर की हॉरर-कॉमेडी फिल्म “Obsession Movie” एक साधारण लेकिन बेहद प्रभावशाली विचार पर आधारित है, क्या होगा अगर आपकी सबसे बड़ी इच्छा पूरी हो जाए, लेकिन वही आपकी सबसे भयानक सपना साबित हो? फिल्म प्रेम, सहमति (कंसेंट), जुनून और मानवीय इच्छाओं के अंधेरे पक्ष को हॉरर और व्यंग्य के माध्यम से सामने लाती है।

क्या है Obsession Movie की कहानी?

फिल्म की कहानी बेयर (माइकल जॉन्स्टन) नाम के एक शर्मीले और अंतर्मुखी युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मित्र निक्की (इंडे नवारेटे) से एकतरफा प्रेम करता है। दोनों एक म्यूजिक स्टोर में साथ काम करते हैं और सामान्य उपनगरीय जीवन जीते हैं।

जब निक्की नौकरी छोड़ने का फैसला करती है, तब बेयर उसे अपने दिल की बात बताने का साहस नहीं जुटा पाता। इसी दौरान वह उसे एक रहस्यमयी ‘वन-विश विलो’ उपहार में देने के लिए खरीदता है। लेकिन संकोचवश उसे देने से पहले ही वह मन ही मन इच्छा करता है कि “निक्की मुझे दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करे।”

उसकी यह इच्छा सच हो जाती है और यहीं से शुरू होता है एक ऐसा डरावना सफर, जो धीरे-धीरे प्रेम कहानी से मनोवैज्ञानिक हॉरर में बदल जाता है।

प्यार, जुनून और सहमति पर गंभीर सवाल

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि यह दर्शकों को लगातार असहज बनाए रखती है। शुरुआत में कई दृश्य हास्य पैदा करते हैं, क्योंकि निक्की बेयर के प्रति असामान्य रूप से जुनूनी और निर्भर होती जाती है।

लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, फिल्म एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है,क्या किसी व्यक्ति का प्रेम उसकी स्वतंत्र इच्छा के बिना हासिल किया जा सकता है?

बेयर खुद भी एक समय यह महसूस करता है कि उसके सामने मौजूद निक्की का प्यार वास्तविक नहीं है। फिल्म इसी बिंदु पर प्रेम और नियंत्रण के बीच की महीन रेखा को उजागर करती है।

हॉरर और सामाजिक टिप्पणी का प्रभावी मिश्रण

करी बार्कर की यह दूसरी फीचर फिल्म है, लेकिन निर्देशन में उनका आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। फिल्म केवल डर पैदा करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि रिश्तों में सहमति, भावनात्मक निर्भरता और स्वामित्व की मानसिकता जैसे विषयों पर भी चर्चा करती है।

कई समीक्षक इसे आधुनिक हॉरर फिल्मों की उस परंपरा का हिस्सा मान रहे हैं, जिसमें सामाजिक मुद्दों को अलौकिक या मनोवैज्ञानिक डर के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।

अभिनय ने बढ़ाया प्रभाव

निक्की के किरदार में इंडे नवारेटे ने बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। उन्होंने अपने चेहरे के भाव, शारीरिक हावभाव और आवाज के माध्यम से किरदार की भयावह मानसिक स्थिति को विश्वसनीय बनाया है।

वहीं माइकल जॉन्स्टन ने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई है, जो बाहर से शांत और संवेदनशील दिखाई देता है, लेकिन भीतर उसकी इच्छाएं धीरे-धीरे विनाशकारी रूप ले लेती हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

फिल्म का संपादन स्वयं करी बार्कर ने किया है। कहानी की गति, अचानक आने वाले झटके, डरावने दृश्य और अप्रत्याशित मोड़ दर्शकों को लगातार बांधे रखते हैं।

बार्कर हॉरर शैली के पारंपरिक तत्वों – जंप स्केयर, डरावने सिल्हूट, हिंसा और मनोवैज्ञानिक तनाव,का प्रभावी उपयोग करते हैं। साथ ही फिल्म में हास्य के क्षण भी मौजूद हैं, जो इसे और दिलचस्प बनाते हैं।

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Neeraj Sahu

नीरज साहू नागपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। वे एक सक्रिय पत्रकार और समाजसेवी के रूप में पहचाने जाते हैं। नीरज साहू समसामयिक विषयों, राजनीती और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर लिखते हैं।
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