घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। 1 फरवरी 2026 को बजट पेश होने से पहले MCX पर स्पेशल रविवार सत्र के दौरान दोनों कीमती धातुओं में रिकॉर्ड स्तर की बिकवाली दर्ज की गई।
चांदी में 1980 के बाद की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी बीते एक दशक की सबसे तेज गिरावट के दौर से गुजरा।
सोना और चांदी सातवें असमान से सीधे धड़ाम
जनवरी के आखिरी सप्ताह तक सोना और चांदी ऐतिहासिक ऊंचाई पर थे।
लेकिन 30 जनवरी को अचानक बाजार का रुख बदला
- चांदी एक ही सत्र में करीब 26–30% तक टूट गई
- सोना लगभग 12% गिर गया
- चांदी फिसलकर ₹2.90 लाख प्रति किलो
- सोना टूटकर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास
यह गिरावट पिछले कई दशकों में सबसे बड़ी मानी जा रही है।
आखिर क्यों टूटीं सोने-चांदी की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे
- भारी मुनाफावसूली – लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने प्रॉफिट बुक किया
- डॉलर में मजबूती – डॉलर मजबूत होते ही धातुओं की चमक फीकी
- मार्जिन बढ़ोतरी – विदेशी एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन बढ़ाने से ट्रेडर्स ने पोजीशन घटाई
- ओवरबॉट जोन – RSI 90 के पार, यानी कीमतें जरूरत से ज्यादा बढ़ चुकी थीं
- वैश्विक अनिश्चितता – अमेरिका, ईरान, चीन और यूरोप से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव
इतिहास की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट
- चांदी: 26% गिरावट (रिकॉर्ड)
- सोना: 10 वर्षों की सबसे बड़ी गिरावट
- प्लेटिनम: 18% टूटा
- स्पॉट गोल्ड: $4,894 प्रति औंस
- चांदी: $85.20 प्रति औंस
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, यह गिरावट 1980 के दशक के बाद सबसे बड़ी मानी जा रही है।
आगे क्या रहेगा बाजार का कैसा रहेगा ?
कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक
“यह गिरावट अचानक नहीं बल्कि ओवरवैल्यूएशन का नतीजा है। बाजार पहले ही करेक्शन के लिए तैयार था।”
विश्लेषकों का मानना है कि आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म में सोने की मांग मजबूत बनी रहेगी।











