सिंगरौली, 5 जनवरी 2026। सिंगरौली जिले में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में प्रशासनिक सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली, जब कलेक्टर श्री गौरव बैनल ने सरई तहसील के भ्रमण के दौरान लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर ग्राम पंचायत गोड़बहरा के ग्राम झुण्डिहवा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण किया और उनकी पहल की सराहना की।
कलेक्टर ने खेतों में उगाई जा रही मौसमी सब्जियों तथा तैयार आम के पौधों का अवलोकन करते हुए कहा कि महिलाएं जिस समर्पण और मेहनत से कृषि आधारित आजीविका को आगे बढ़ा रही हैं, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत सकारात्मक संकेत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्व-सहायता समूहों की यह पहल न केवल परिवारों की आय बढ़ा रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने गांव में ही स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित आटा चक्की का भी जायजा लिया। उन्होंने समूह की दीदियों से संवाद करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के ऐसे मॉडल जिले के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायी हैं। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिला प्रशासन हर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
महिलाओं को प्रेरित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि गांव में मुर्गी पालन, बकरी पालन और मछली पालन जैसे आजीविका कार्यों को और अधिक विस्तार दिया जा सकता है। इसके लिए अधिक से अधिक महिलाओं को जोड़कर नए समूह बनाए जाएं और ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं। उन्होंने बताया कि इन समूहों का पंजीयन कर सीएसआर और डीएमएफ मद के माध्यम से वित्तीय सहयोग प्रदान किया जाएगा, साथ ही शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से भी उन्हें जोड़ा जाएगा।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव में स्थित तालाब का गहरीकरण कराया जाए और हेचरी के माध्यम से मछली पालन के लिए स्व-सहायता समूहों को बीज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विस्थापित महिलाओं को भी आजीविका से जोड़ने के लिए उनके समूहों का गठन प्राथमिकता से किया जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने जिला परियोजना प्रबंधक को निर्देशित किया कि प्लांटेशन के माध्यम से फलों की गुणवत्ता और किस्मों को बढ़ावा देने के लिए उद्यानिकी विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से स्व-सहायता समूहों को नियमित प्रशिक्षण दिलाया जाए। उनका कहना था कि तकनीकी प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं अपनी आय में स्थायी वृद्धि कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, यह दौरा प्रशासन की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें विकास योजनाओं का लाभ सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचाने और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की यह पहल आने वाले समय में सिंगरौली के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक बदलाव की आधारशिला साबित हो सकती है।











