मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं (अब कर्मचारी चयन मंडल) से जुड़े 18 साल पुराने कंप्यूटर खरीदी मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भोपाल की विशेष अदालत ने मूल दस्तावेज नष्ट हो जाने के बाद फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य के रूप में स्वीकार करते हुए सुनवाई जारी रखने की अनुमति दे दी है।
अदालत का अहम फैसला
विशेष न्यायाधीश मनोज सिंह कुमार की अदालत ने ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) के आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि, रिकॉर्ड में मौजूद फोटोकॉपी मूल दस्तावेजों से ही तैयार की गई थीं, इनकी प्रतियां पहले ही बचाव पक्ष को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
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इसी आधार पर कोर्ट ने फोटोकॉपी को वैध द्वितीयक साक्ष्य मानते हुए केस की सुनवाई आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
कैसे नष्ट हुए मूल दस्तावेज?
ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2008 में केस दर्ज होने के दौरान मूल दस्तावेजों से फोटोकॉपी तैयार कर अदालत में जमा की गई थी, इसके बाद मूल दस्तावेज रिकॉर्ड रूम में सुरक्षित रखे गए थे। समय के साथ रिकॉर्ड रूम में रखे दस्तावेज नष्ट हो गए। अब मूल दस्तावेज उपलब्ध न होने के कारण उनकी पुनर्प्राप्ति संभव नहीं है।

बचाव पक्ष ने उठाए सवाल
बचाव पक्ष की ओर से मूल दस्तावेजों के नष्ट होने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए, फोटोकॉपी की प्रामाणिकता को भी चुनौती दी गई। हालांकि अदालत ने इन आपत्तियों के बावजूद फोटोकॉपी को स्वीकार कर लिया।
अगली सुनवाई कब?
मामले में विवेचक के शेष मुख्य परीक्षण के लिए अगली तारीख 14 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2008 में व्यापमं द्वारा 78 कंप्यूटर और सर्वर खरीदे गए।
जांच में आरोप लगा कि बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदी हुई।
टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और पक्षपात के आरोप।
सरकारी खजाने को करीब 43 लाख रुपये का नुकसान।
इस लंबे केस में अब तक कई आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ मामला जारी है।
Frequently Asked Questions
कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
फोटोकॉपी को द्वितीयक साक्ष्य मानकर सुनवाई जारी रखने की अनुमति
मूल दस्तावेज क्यों नहीं हैं?
रिकॉर्ड रूम में समय के साथ नष्ट हो गए
केस कब का है?
वर्ष 2008 का
अगली सुनवाई कब है?
14 अक्टूबर 2026




