सिवनी। हालात मुश्किल थे, संसाधन सीमित थे, लेकिन मंजिल पाने का जुनून कम नहीं हुआ। सिवनी जिले के छोटे से गांव के विजय कुमार देहारिया ने संघर्षों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया। कभी परिवार की मदद के लिए भैंस चराने वाले विजय ने जंगल में बैठकर किताबें पढ़ीं और नौकरी करते हुए भी सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी और आखिरकार MPPSC परीक्षा में 38वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए।
सिवनी जिले के विजय कुमार देहारिया ने संघर्ष और दृढ़ संकल्प के दम पर सफलता की मिसाल पेश की है। कभी परिवार की मदद के लिए भैंस चराने वाले विजय ने सीमित संसाधनों के बावजूद पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार MPPSC परीक्षा में 38वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुए।
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विजय कुमार ने जंगल में रहकर किताबों से पढ़ाई की और फॉरेस्ट गार्ड की नौकरी के दौरान भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया। सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने 6 बार प्रीलिम्स, 5 बार मेन्स और 3 बार इंटरव्यू दिए। लगातार असफलताओं और लोगों के तानों के बावजूद विजय ने हिम्मत नहीं छोड़ी। 2018 की MPPSC परीक्षा में उनकी मेहनत रंग लाई और 38वीं रैंक के साथ उनका डिप्टी कलेक्टर बनने का सपना पूरा हुआ।




