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राजा रवि वर्मा की ‘यशोदा और कृष्ण’ पेंटिंग ₹167.2 करोड़ में बिकी, भारतीय कला में बना नया इतिहास

मुंबई में सैफ्रनआर्ट की नीलामी में राजा रवि वर्मा की ‘यशोदा और कृष्ण’ पेंटिंग ₹167.2 करोड़ में बिकी। यह आधुनिक भारतीय कला की अब तक की सबसे महंगी बिक्री बन गई।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 03 Apr 2026, 12:56 PM IST | 1 min read
राजा रवि वर्मा की ‘यशोदा और कृष्ण’ पेंटिंग ₹167.2 करोड़ में बिकी, भारतीय कला में बना नया इतिहास
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भारतीय कला जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की प्रतिष्ठित पेंटिंग ‘यशोदा और कृष्ण’ हाल ही में मुंबई स्थित Saffronart की नीलामी में ₹167.2 करोड़ (करीब 1.8 करोड़ डॉलर) में बिकी। यह आधुनिक भारतीय कला के इतिहास में अब तक की सबसे महंगी पेंटिंग बन गई है।

1890 के दशक में बनाई गई इस पेंटिंग में माता यशोदा और बाल कृष्ण के बीच एक भावनात्मक और स्नेहपूर्ण क्षण को दर्शाया गया है। कोमल रंगों और सूक्ष्म अभिव्यक्ति के जरिए कलाकार ने मातृत्व और दिव्यता के अद्भुत संगम को चित्रित किया है। कला विशेषज्ञों के अनुसार, यही भावनात्मक गहराई इस कृति को खास बनाती है।

नीलामी से पहले इस पेंटिंग का अनुमानित मूल्य ₹80 से ₹120 करोड़ के बीच लगाया गया था, लेकिन अंतिम बोली ने सभी अनुमान पीछे छोड़ दिए। इस रिकॉर्ड बिक्री ने भारतीय कला के वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग और मूल्य को भी रेखांकित किया है।

इस दुर्लभ कृति को Cyrus S Poonawalla, जो Serum Institute of India के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ने खरीदा। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय धरोहर” बताते हुए कहा कि इसे समय-समय पर सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस बिक्री ने एमएफ हुसैन की पेंटिंग ‘Untitled (Gram Yatra)’ के पिछले रिकॉर्ड (₹118 करोड़) को पीछे छोड़ दिया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय कला की विरासत और उसकी बाजार में प्रतिष्ठा लगातार मजबूत हो रही है।

राजा रवि वर्मा, जिनका जन्म 1848 में केरल के किलिमानूर में हुआ था, भारतीय पौराणिक कथाओं को तेल चित्रों के माध्यम से जीवंत करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाओं में शकुंतला, सीता, दमयंती और द्रौपदी जैसे पात्रों का चित्रण भारतीय संस्कृति पर गहरा प्रभाव छोड़ चुका है।

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त्रावणकोर के शाही परिवार से जुड़ी पूयम तिरुनाल गौरी पार्वती बायी ने इस बिक्री पर खुशी जताते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि यह अमूल्य कृति भारत में ही बनी रहेगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक समय रवि वर्मा को “पोस्टर पेंटर” कहकर आलोचना का सामना करना पड़ा था, लेकिन आज उनकी कला को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है।

सैफ्रनआर्ट की सह-संस्थापक मीनल वजीरानी के अनुसार, यह बिक्री न केवल एक बाजार उपलब्धि है, बल्कि भारतीय कला की सांस्कृतिक और भावनात्मक गूंज का प्रमाण भी है। यह घटना दर्शाती है कि समय के साथ कला का महत्व और मूल्य दोनों बढ़ते जाते हैं।

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