सिंगरौली। ऊर्जांचल में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। सिंगरौली में निर्माणाधीन माइनिंग इंजीनियरिंग कॉलेज के विस्तार के लिए एनसीएल और तकनीकी शिक्षा संचालनालय, भोपाल के बीच 15 अक्टूबर को एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।
ऊर्जांचल के युवाओं को उच्च तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सिंगरौली में निर्माणाधीन माइनिंग इंजीनियरिंग कॉलेज के विस्तार के लिए एनसीएल और तकनीकी शिक्षा संचालनालय, भोपाल के बीच 15 अक्टूबर को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत ₹30.75 करोड़ की अतिरिक्त लागत से कॉलेज में एक और तल का निर्माण किया जाएगा। इस विस्तार के साथ संस्थान के विकास पर एनसीएल का कुल CSR निवेश ₹107 करोड़ से अधिक हो जाएगा।
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कॉलेज को वर्ष 2027 के शैक्षणिक सत्र से शुरू करने की योजना है। यहां बीटेक के चार पाठ्यक्रम प्रस्तावित हैं। इनमें माइनिंग इंजीनियरिंग की 120, ऊर्जा इंजीनियरिंग की 60, विद्युत इंजीनियरिंग की 60 और पर्यावरण इंजीनियरिंग की 60 सीटें शामिल हैं। इस प्रकार प्रतिवर्ष कुल 300 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना बनाई गई है। अतिरिक्त निर्माण के अंतर्गत आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, ट्यूटोरियल कक्षों, संकाय कक्षों, सभागार, पुस्तकालय और कंप्यूटिंग सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इसके साथ ही आवश्यक फर्नीचर, उपकरण और मशीनरी की व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
एनसीएल ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में कॉलेज की स्थापना के लिए तकनीकी शिक्षा संचालनालय के साथ प्रारंभिक एमओयू कर ₹76.56 करोड़ की राशि स्वीकृत की थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक परियोजना पर ₹43.47 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। मूल परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। एमओयू पर एनसीएल के महाप्रबंधक (सीएसआर) राजीव रंजन और तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अपर संचालक डॉ. मोहन सेन ने हस्ताक्षर किए। माइनिंग इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना और विस्तार को सिंगरौली के शैक्षणिक एवं औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। संस्थान के शुरू होने से स्थानीय विद्यार्थियों को खनन, ऊर्जा, विद्युत और पर्यावरण अभियांत्रिकी जैसे क्षेत्रों में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही इन क्षेत्रों के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने और युवाओं की रोजगारपरक दक्षता बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।




