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मध्य प्रदेश UCC विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी, जानिए क्या बदल जाएगा !

मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दे दी है। जानिए इसके मुख्य प्रावधान, महिलाओं के अधिकार, लिव-इन नियम और आगे की प्रक्रिया।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 26 Jul 2026, 07:13 PM IST | 1 min read
मध्य प्रदेश UCC विधेयक को कैबिनेट मंजूरी
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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा अब एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। राज्य मंत्रिमंडल ने यूसीसी विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। इस फैसले ने न केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में नई बहस को जन्म दे दिया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह कानून सभी नागरिकों को समान अवसर और अधिकार देने की दिशा में तैयार किया गया है। उनके अनुसार, विधेयक का उद्देश्य किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन करना नहीं, बल्कि कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित करना है।

कैबिनेट बैठक में क्या हुआ?

भोपाल के निकट जगदीशपुर में आयोजित विशेष मंत्रिमंडल बैठक में यूसीसी विधेयक को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने बताया कि विधेयक का मसौदा व्यापक जनपरामर्श के बाद तैयार किया गया है।

सरकार का कहना है कि मसौदा तैयार करने से पहले सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रदेश के सभी जिलों और संभागों में लोगों से सुझाव लिए। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय विचार-विमर्श में राजनीतिक दलों और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी रही।

यूसीसी विधेयक में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

प्रस्तावित विधेयक में कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल किए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • एक से अधिक विवाह को वैध मान्यता नहीं होगी।
  • महिलाओं और पुरुषों को समान उत्तराधिकार अधिकार मिलेंगे।
  • लिव-इन रिलेशनशिप का एक महीने के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • विवाह का पंजीकरण गांव स्तर तक अनिवार्य किया जाएगा।
  • जनजातीय समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

इन प्रावधानों का उद्देश्य पारिवारिक और नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना बताया गया है।

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महिलाओं के अधिकारों पर विशेष जोर

सरकार का कहना है कि यूसीसी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष महिलाओं को समान अधिकार देना है। उत्तराधिकार संबंधी समान अधिकार और विवाह संबंधी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था महिलाओं की कानूनी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि समिति के परामर्श के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस कानून का समर्थन किया। सरकार के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं और 40 प्रतिशत पुरुषों ने यूसीसी लागू करने के पक्ष में अपनी राय दी।

सरकार ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह निर्णय “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना के अनुरूप लिया गया है। उन्होंने इसे वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का मानना है कि इस विधेयक से किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।

अब आगे क्या होगा?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण विधानसभा है। आज से शुरू हो रहे मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार यूसीसी विधेयक पेश करेगी। यदि विधानसभा से इसे मंजूरी मिलती है, तो आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ेंगे।

विधानसभा में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जहां विभिन्न दल अपने-अपने विचार रख सकते हैं।

यह फैसला क्यों चर्चा में है?

समान नागरिक संहिता लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही है। ऐसे में मध्य प्रदेश द्वारा विधेयक को कैबिनेट से मंजूरी दिए जाने को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है।

इस फैसले पर समर्थक इसे समान अधिकारों की दिशा में कदम बता रहे हैं, जबकि इसके विभिन्न पहलुओं पर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा जारी रहने की संभावना है। अंतिम स्वरूप और प्रभाव विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

मध्य प्रदेश में यूसीसी विधेयक को किसने मंजूरी दी?

मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने विशेष कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को मंजूरी दी है। अब इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।

यूसीसी विधेयक में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?

प्रस्तावित विधेयक में एक से अधिक विवाह पर रोक, महिलाओं और पुरुषों को समान उत्तराधिकार, विवाह पंजीकरण अनिवार्य और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

क्या लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा?

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर अपना पंजीकरण कराना होगा।

क्या जनजातीय समुदायों पर भी यूसीसी लागू होगा?

नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनजातीय समुदायों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

यूसीसी विधेयक लागू होने की अगली प्रक्रिया क्या होगी?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधेयक को विधानसभा में पेश किया जाएगा। वहां पारित होने और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे लागू किया जा सकेगा।

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