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इंदौर-पिथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में पानी की मांग 55 MLD, 5 MLD की बढ़ोतरी

इंदौर और पिथमपुर के औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की मांग 55 MLD तक पहुंची। गर्मी और नए उद्योगों के कारण बढ़ी जरूरत, प्रशासन नई जल परियोजनाओं पर कर रहा काम।

ब्यूरो कार्यालय

Author | Updated: 31 Mar 2026, 01:18 PM IST | 1 min read
इंदौर-पिथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में पानी की मांग 55 MLD, 5 MLD की बढ़ोतरी
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मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र इंदौर और पिथमपुर में पानी की मांग तेजी से बढ़कर 55 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) तक पहुंच गई है। यह पिछले स्तर की तुलना में करीब 5 MLD की वृद्धि दर्शाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस बढ़ोतरी के पीछे दो मुख्य कारण हैं, गर्मी का मौसम और नए औद्योगिक प्रोजेक्ट्स की शुरुआत। जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, उद्योगों में उत्पादन की मांग भी बढ़ती है, जिससे पानी की खपत में सीधा इजाफा होता है।

पिथमपुर, जिसे मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक हब माना जाता है, यहां ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हजारों उद्योग संचालित हैं। हाल के वर्षों में नए औद्योगिक क्षेत्रों जैसे स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप और अन्य क्लस्टर्स के विकसित होने से जल की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।

गर्मी और औद्योगिक विस्तार से बढ़ा दबाव

गर्मी के मौसम में प्राकृतिक जल स्रोतों, जैसे बांध और जलाशय पर दबाव बढ़ जाता है। इसके कारण कई उद्योगों को वैकल्पिक रूप से टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इसके अलावा, उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए कई उद्योग लगातार काम कर रहे हैं, जिससे पानी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में अधिक हो जाती है।

नए स्टोरेज और सप्लाई सिस्टम

बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन और मध्य प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPIDC) नई जल संरचनाओं पर काम कर रहा है। इसमें ग्राउंड और ओवरहेड जलाशय, पाइपलाइन नेटवर्क और समर्पित बिजली आपूर्ति (फीडर) शामिल हैं, ताकि जल वितरण बाधित न हो।

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इसके साथ ही, पिथमपुर क्षेत्र में अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए नए टैंक और सप्लाई सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। यह कदम खासतौर पर गर्मी के दौरान संभावित संकट से निपटने के लिए उठाया गया है।

चुनौती और समाधान

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि औद्योगिक विस्तार इसी गति से जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में जल की मांग और बढ़ सकती है। ऐसे में रीसायकल वाटर, जल संरक्षण और स्मार्ट मैनेजमेंट सिस्टम को अपनाना जरूरी होगा।

इंदौर, जो पहले ही देश का ‘वॉटर प्लस’ शहर घोषित हो चुका है, अब औद्योगिक जरूरतों और शहरी जल प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है।

कुल मिलाकर, इंदौर-पिथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ती जल मांग राज्य के औद्योगिक विकास का संकेत है, लेकिन इसके साथ जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।

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