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अनूठी दुर्गा झांकी: बैंक लॉकर से निकलते हैं मां जगदम्बा के बेशकीमती आभूषण,

Om Prakash Shah

Author | Updated: 18 Oct 2026, 03:19 PM IST | 1 min read
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भोपाल। राजधानी भोपाल के पुराने शहर स्थित पीपल चौक की दुर्गा झांकी अपनी भव्यता, ऐतिहासिक परंपरा और अनूठे श्रृंगार के लिए विशेष पहचान रखती है। यहां मां जगदम्बा के दर्शन से पहले उनके स्वर्ण आभूषणों की चमक श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। आजादी के सात वर्ष बाद शुरू हुई इस ऐतिहासिक झांकी ने 72 वर्षों की परंपरा पूरी कर ली है।

राजधानी भोपाल के पुराने शहर स्थित पीपल चौक की ऐतिहासिक दुर्गा झांकी अपनी भव्यता और अनूठी परंपरा के लिए विशेष पहचान रखती है। यहां मां जगदम्बा का दरबार असली सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। माता के श्रृंगार में करीब सवा किलो सोने के गहनों का इस्तेमाल होता है। खास बात यह है कि इन आभूषणों को दुर्गोत्सव के दौरान बैंक लॉकर से निकालकर माता को पहनाया जाता है और दशहरे के बाद दोबारा सुरक्षित रख दिया जाता है। आजादी के सात वर्ष बाद शुरू हुई यह दुर्गा झांकी 72 वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। इस ऐतिहासिक परंपरा की शुरुआत उद्धव दास मेहता ने की थी। समय के साथ भोपाल का स्वरूप बदला, लेकिन पीपल चौक की झांकी की भव्यता और धार्मिक परंपरा आज भी कायम है।

पीपल चौक की झांकी में मां दुर्गा का श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। रानी हार, दो मंगलसूत्र, करधनी, पायल, बिछुए, कंगन और विभिन्न प्रकार के झुमकों सहित अनेक स्वर्ण आभूषण माता को अर्पित किए जाते हैं। नौ दिनों तक प्रतिदिन माता का श्रृंगार बदला जाता है। दिन और रात्रि के लिए भी अलग-अलग श्रृंगार की व्यवस्था रहती है, जिससे भक्तों को हर बार माता के नए स्वरूप के दर्शन होते हैं। समिति के सदस्य केशव कुलवानी के अनुसार, दुर्गोत्सव शुरू होने से पहले माता के आभूषण बैंक लॉकर से निकाले जाते हैं। नौ दिनों तक विधि-विधान से श्रृंगार करने के बाद दशहरे पर इन्हें वापस सुरक्षित रख दिया जाता है। सराफा व्यापारियों के सहयोग से सजने वाली यह झांकी अपनी विशिष्ट परंपरा के कारण विशेष पहचान रखती है।

माता के दरबार को भव्य रूप देने के लिए प्रतिदिन बड़ी मात्रा में फूलों का उपयोग किया जाता है। विदिशा से आए आचार्य अमित नारायण शास्त्री के अनुसार, मां जगदम्बा को 56 प्रकार के भोग अर्पित किए जाते हैं। फूलों की सजावट और स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित माता का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। पीपल चौक की यह ऐतिहासिक झांकी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भोपाल की सांस्कृतिक विरासत और वर्षों पुरानी आस्था का प्रतीक है। सात दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। नवरात्र के दौरान यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां जगदम्बा के भव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं।

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