जब भी कर्ज (Loan) का नाम आता है, आम आदमी के मन में डर बैठ जाता है। लेकिन यही कर्ज दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों जैसे मुकेश अंबानी और गौतम अडानी के लिए कामयाबी की सीढ़ी बन जाता है।सबसे बड़ा सवाल यह है की, जब इनके पास पहले से अरबों रुपये हैं, तो फिर कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ती है?इस सवाल का जवाब छिपा है फाइनेंशियल माइंडसेट ( Financial mindset) में।
Billionaire पैसा नहीं, अवसर देखते हैं
मुकेश अंबानी और गौतम अडानी जैसे कारोबारी कर्ज को मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक टूल मानते हैं।वे कर्ज इसलिए नहीं लेते क्योंकि उनके पास पैसा नहीं होता, बल्कि इसलिए लेते हैं ताकि
- अपने खुद के पैसे को सुरक्षित रख सकें
- बड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से शुरू कर सकें
- भविष्य में ज्यादा रिटर्न कमा सकें
यही वजह है कि उनकी कंपनियां लगातार अपना विस्तार कर रही हैं।
Loan का पैसा कहां लगाया जाता है?
Billionaire जिस Loan को लेते हैं, वह आम खर्चों में खर्च नहीं किया जाता।
उनका Loan का पैसा लगता है
- इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में
- एनर्जी और ग्रीन पावर सेक्टर में
- पोर्ट्स, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स में
- डेटा सेंटर्स और डिजिटल नेटवर्क में
ये सभी ऐसे एसेट हैं जो लंबे समय तक कमाई करते हैं।

आम आदमी vs अरबपति
| आम आदमी (Common man) | Billionaire |
|---|---|
| मोबाइल, कार के लिए लोन | बिजनेस विस्तार के लिए लोन |
| EMI बोझ बन जाती है | लोन से मुनाफा बनता है |
| खर्च बढ़ता है | कमाई बढ़ती है |
| वैल्यू घटती है | वैल्यू कई गुना बढ़ती है |
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार,
“कर्ज बुरा नहीं होता, बुरा होता है उसका गलत इस्तेमाल।”
अगर लोन से होने वाली कमाई, लोन की ब्याज दर से ज्यादा है, तो वही कर्ज वेल्थ क्रिएशन टूल बन जाता है।
2026 में क्यों बढ़ रहा है कॉरपोरेट लोन?
2026 में भारत में:
- इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश
- ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स
- मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस सेक्टर का विस्तार
इसी वजह से बड़ी कंपनियां रणनीतिक रूप से लोन उठा रही हैं।











