विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने “University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026” को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है।इन नियमों का उद्देश्य देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करना और सभी छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराना है।
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब IIT दिल्ली की 2019 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि लगभग 75% दलित और वंचित वर्ग के छात्र किसी न किसी रूप में भेदभाव का सामना करते हैं।
UGC Equity Regulations 2026 की प्रमुख बातें
नई नियमावली में अब भेदभाव की परिभाषा को और व्यापक बनाया गया है, जिसमें शामिल हैं
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- धर्म, लिंग, जन्म स्थान
- दिव्यांगता आधारित भेदभाव
यह पहली बार है जब OBC वर्ग को कानूनी रूप से स्पष्ट संरक्षण दिया गया है।
हर संस्थान में Equal Opportunity Centre (EOC) अनिवार्य
अब सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में
- Equal Opportunity Centre (EOC) की स्थापना
- अलग से Equity Committee
- SC, ST, OBC, महिला व दिव्यांग प्रतिनिधित्व अनिवार्य
- संस्थान प्रमुख होंगे समिति के अध्यक्ष
रिपोर्टिंग और जवाबदेही की व्यवस्था
- EOC को हर 6 महीने में रिपोर्ट देनी होगी
- संस्थानों को सालाना रिपोर्ट UGC को भेजनी होगी
- लापरवाही की सीधी जिम्मेदारी संस्थान प्रमुख की होगी
राष्ट्रीय निगरानी समिति का गठन
UGC द्वारा एक नेशनल मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें शामिल होंगे:
- वैधानिक संस्थाओं के प्रतिनिधि
- सामाजिक संगठनों के सदस्य
- शिक्षा विशेषज्ञ
यह समिति साल में कम से कम दो बार समीक्षा करेगी।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
नियमों का उल्लंघन करने पर संस्थानों पर
- UGC योजनाओं से वंचना
- डिग्री और ऑनलाइन कोर्स पर रोक
- मान्यता रद्द तक की कार्रवाई
UGC का संक्षिप्त इतिहास
- 1944: सार्जेंट रिपोर्ट से विचार की शुरुआत
- 1948: राधाकृष्णन आयोग
- 1953: मौलाना अबुल कलाम आज़ाद द्वारा स्थापना
- 1956: UGC को वैधानिक दर्जा
- मुख्यालय: नई दिल्ली
शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। UGC की नई इक्विटी नियमावली भारत को समान शिक्षा अधिकार की दिशा में ले जाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। अब असली चुनौती इन नियमों के ईमानदार और प्रभावी क्रियान्वयन की है।











