सुप्रीम कोर्ट ने एसिड हमलों के लिए कड़े उपाय सुझाए। आरोपी की प्रॉपर्टी अटैच करने और दहेज कानून जैसा नया कानून लाने को कहा। शाहीन मलिक के केस पर सुनवाई में कोर्ट ने नाराजगी जताई।
सुप्रीम कोर्ट ने एसिड हमलों पर सख्ती का ऐलान किया। मंगलवार को कोर्ट ने कहा कि असाधारण दंडात्मक उपायों की जरूरत है। इसमें आरोपी की प्रॉपर्टी अटैच करना भी शामिल है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को दहेज विरोधी कानून जैसा सख्त कानून लाने पर विचार करने को कहा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा। इसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची भी थे। बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “आरोपी की प्रॉपर्टी क्यों अटैच न की जाए? अगर मुआवजा न दे सके तो प्रॉपर्टी अटैच हो। कानून से परे कड़े कदम जरूरी हैं। सुधारवादी सिद्धांत यहां काम नहीं आएगा।”

यह सुनवाई शाहीन मलिक की याचिका पर हो रही थी। शाहीन एसिड हमले की शिकार हैं। उन्होंने सभी पीड़ितों के लिए कानूनी सुरक्षा और पुनर्वास की मांग की। शाहीन ने बताया कि वे 20 साल से केस लड़ रही हैं। दिल्ली कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा। केंद्र को दहेज निषेध कानून जैसा एसिड हमलों के लिए कानून लाने पर सोचना चाहिए।
4 दिसंबर को पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्यों से डेटा मांगा था। एसिड हमलों के मामले, चार्जशीट और ट्रायल की स्थिति बताने को कहा। मंगलवार को बताया गया। बंगाल में 60 मामले लंबित हैं। उत्तर प्रदेश में 198, गुजरात में 114, महाराष्ट्र में 55 और बिहार में 68 मामले हैं।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने शाहीन के केस में 16 साल की देरी पर दुख जताया। कोर्ट ने कहा कि यह कानूनी व्यवस्था का मजाक है।











