सिंगरौली बनेगा ‘गोल्ड हब’, ग्रामीणों ने जनसुनवाई में दिया समर्थन

By: Rakesh Kumar Vishwakarma

On: Wednesday, February 4, 2026 11:52 PM

सिंगरौली बनेगा ‘गोल्ड हब’, ग्रामीणों ने जनसुनवाई में दिया समर्थन
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ऊर्जा नगरी सिंगरौली, जो अब तक कोयला खदानों और थर्मल पावर प्लांट्स के लिए जानी जाती थी, अब सोने की खनन परियोजना के कारण नई पहचान की ओर बढ़ रही है। चितरंगी तहसील के सिल्फोरी और सिधार गांव स्थित गुड़हर पहाड़ी पर प्रस्तावित कुंदन गोल्ड माइंस प्राइवेट लिमिटेड की सोना खदान को लेकर आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने सकारात्मक रुख दिखाया है।

जनसुनवाई में किसी तरह का विरोध नहीं हुआ, बल्कि स्थानीय लोगों ने रोजगार, उचित मुआवजा और सुरक्षित कार्य वातावरण की मांग रखी, जिस पर कंपनी और प्रशासन ने सहमति जताई। इसे जिले के आर्थिक भविष्य के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

जनसुनवाई में दिखा भरोसा, 500 से अधिक ग्रामीणों की भागीदारी

4 फरवरी को आयोजित इस सार्वजनिक सुनवाई में करीब 500 ग्रामीणों ने हिस्सा लिया। बैठक में कंपनी के सीईओ गौरव दुआ, एडमिन एग्जीक्यूटिव संजय कुमार विश्वकर्मा, प्रशासनिक अधिकारी, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम चितरंगी तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

ग्रामीण युवाओं और महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि परियोजना से स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए। कंपनी ने प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने का आश्वासन दिया है, ताकि स्थानीय युवाओं को सीधे लाभ मिल सके।

सोने का भंडार कितना बड़ा? आंकड़ों से समझिए

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की रिपोर्ट के अनुसार गुड़हर पहाड़ी क्षेत्र में

  • 7.29 मिलियन टन सोना अयस्क का अनुमान
  • ग्रेड: 1.03 ग्राम प्रति टन
  • प्रस्तावित उत्पादन क्षमता: 1.12 मिलियन टन प्रतिवर्ष
  • कुल क्षेत्रफल: 149.3 हेक्टेयर

कंपनी को मार्च 2023 में आशय पत्र (LOI) मिला था और अगस्त 2024 में माइनिंग प्लान स्वीकृत हुआ। इसके बाद अब पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

सिंगरौली की अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत

अब तक कोयला आधारित उद्योगों पर निर्भर सिंगरौली के लिए यह परियोजना आर्थिक विविधीकरण का अवसर है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार

  • सैकड़ों प्रत्यक्ष रोजगार
  • हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार
  • किसानों को मुआवजा
  • स्थानीय व्यापार और परिवहन में बढ़ोतरी
  • जिले को करोड़ों रुपये का राजस्व

सोने की मौजूदा बाजार कीमत को देखते हुए यह खदान राज्य के लिए बड़ा राजस्व स्रोत बन सकती है।

पर्यावरण सुरक्षा पर भी जोर

खनन परियोजनाओं से पर्यावरणीय खतरे भी जुड़े होते हैं। जनसुनवाई में ग्रामीणों ने वन क्षेत्र और जल स्रोतों की सुरक्षा की मांग उठाई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट किया कि

  • धूल नियंत्रण के लिए स्प्रिंकलिंग
  • जल संरक्षण उपाय
  • हरित पट्टी विकास
  • पर्यावरणीय मॉनिटरिंग

जैसे नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। कंपनी ने “सस्टेनेबल माइनिंग” मॉडल अपनाने की बात कही है।

Rakesh Kumar Vishwakarma

राकेश कुमार विश्वकर्मा को मिडिया के क्षेत्र में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है। पाठकों से भावनात्मक जुड़ाव बनाना उनकी लेखनी की खासियत है। अपने पत्रकारिता के लंबे करियर में ट्रेंडिंग कंटेंट को 'वायरल' बनाने के साथ-साथ राजनीती और मनोरंजन जगत पर भी विशेषज्ञता हासिल की है।
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