Shark Tank India Season 5 के हालिया एपिसोड में आयुर्वेदिक वेलनेस ब्रांड Ayuvya ने एंट्री के साथ ही शार्क्स का ध्यान खींच लिया। कंपनी ने अपने मजबूत रेवेन्यू नंबर पेश किए, लेकिन बातचीत आगे बढ़ते ही यह पिच मुनाफे से ज्यादा भरोसे के सवालों में उलझ गई।
Ayuvya की स्थापना तनिष्क पांडे, आस्था जैन और पवनजोत कौर ने की है। फाउंडर्स ने अपनी सहयोगी ब्रांड ImFresh के साथ मिलकर ₹1 करोड़ के बदले 0.5% इक्विटी की मांग की, जिससे कंपनी का वैल्यूएशन लगभग ₹200 करोड़ बैठता है।
दमदार शुरुआत, लेकिन सवालों से घिरी ग्रोथ
पिच की शुरुआत काफी मजबूत रही। फाउंडर्स ने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में Ayuvya ने ₹51.5 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है और अगले साल इसे ₹70 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। ये आंकड़े सुनकर शार्क्स भी कुछ पल के लिए प्रभावित नजर आए।
लेकिन जब कुणाल बहल ने ग्रोथ रेट और कस्टमर रीपीट बिहेवियर को लेकर सवाल किए, तो फाउंडर्स स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। यहीं से शार्क्स को कंपनी की लॉन्ग-टर्म सस्टेनेबिलिटी पर संदेह होने लगा।
मार्केटिंग पर उठे सवाल, ‘Ugly Ads’ पर नहीं बनी बात
मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर चर्चा के दौरान अमन गुप्ता ने Ayuvya के सोशल मीडिया ऐड्स को कमजोर बताया। जब फाउंडर तनिष्क ने कहा कि आजकल “ugly ads” ट्रेंड में हैं क्योंकि वे ज्यादा रियल लगते हैं, तो शार्क्स इस तर्क से सहमत नहीं दिखे।
उनका मानना था कि हेल्थ और वेलनेस से जुड़े प्रोडक्ट्स में भरोसे और ब्रांड इमेज की भूमिका सबसे अहम होती है।
क्लिनिकल ट्रायल न होना बना सबसे बड़ी कमजोरी
डील का टर्निंग पॉइंट तब आया जब यह सामने आया कि Ayuvya के किसी भी आयुर्वेदिक प्रोडक्ट पर क्लिनिकल ट्रायल नहीं हुआ है।
फाउंडर्स ने इसे पारंपरिक ग्रंथों और आयुर्वेदिक ज्ञान पर आधारित बताया, लेकिन शार्क्स ने साफ कहा कि आज के दौर में वैज्ञानिक वैलिडेशन जरूरी है, खासकर जब बात हेल्थ प्रोडक्ट्स की हो।
“पहले विश्वास बनाइए” – कुणाल बहल
कुणाल बहल ने निवेश से इनकार करते हुए कहा,
“आपने अच्छा बिजनेस बनाया है, लेकिन इलाज से पहले भरोसा जरूरी है।”
इसके बाद रितेश अग्रवाल और अमन गुप्ता ने भी यही कहते हुए डील से दूरी बना ली कि ब्रांड अभी उस स्तर पर नहीं पहुंचा है, जिस पर कंज़्यूमर आंख बंद कर भरोसा कर सके।











