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Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान में शब-ए-कद्र क्या है, कब होती है और इस रात की खास अहमियत

By: Shabana Parveen

On: Tuesday, March 10, 2026 11:50 AM

Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान में शब-ए-कद्र क्या है, कब होती है और इस रात की खास अहमियत
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Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रोज़ा और रहमत का महीना माना जाता है। इसी पाक महीने में एक खास रात आती है जिसे शब-ए-कद्र कहा जाता है। इस रात को इस्लाम में बेहद मुकद्दस माना गया है और इसे हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। शब-ए-कद्र का अंदाजन वक़्त रमज़ान के आखिरी दस दिनों में माना जा रहा है।

शब-ए-कद्र का क्या मतलब होता है

अरबी ज़बान में “लैलतुल कद्र” या “शब-ए-कद्र” का मतलब होता है ताकत, फैसला या बरकत की रात। इस्लाम के मुताबिक इसी रात अल्लाह ने फरिश्ते जिब्रील के जरिए पैगंबर हजरत मोहम्मद को पहली बार कुरआन की आयतें उतारी थीं।

कुरआन की सूरह “अल-कद्र” में बताया गया है कि यह रात हजार महीनों से बेहतर है। इसलिए मुसलमान इस रात को खास इबादत, नमाज और दुआ में बिताने की कोशिश करते हैं।

Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान में शब-ए-कद्र क्या है, कब होती है और इस रात की खास अहमियत

रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आती है यह रात

इस्लामी जानकारों के मुताबिक शब-ए-कद्र रमज़ान के आखिरी दस दिनों में आती है। खास तौर पर 21, 23, 25, 27 या 29वीं रात में इसे तलाश करने की सलाह दी जाती है।

हालांकि आम तौर पर दुनिया के कई हिस्सों में इसे 27वीं रमज़ान की रात माना जाता है, लेकिन इसकी सही रात तय नहीं बताई गई है।

Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान में शब-ए-कद्र क्या है, कब होती है और इस रात की खास अहमियत
– Shab-e-Qadr 2026

इस रात मुसलमान क्या करते हैं

शब-ए-कद्र की रात मुसलमान पूरी रात जागकर इबादत करते हैं। मस्जिदों में खास नमाज पढ़ी जाती है और लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस रात आम तौर पर लोग,

  • कुरआन की तिलावत करते हैं
  • नफ्ल नमाज पढ़ते हैं
  • दुआ और इस्तगफार करते हैं
  • जरूरतमंदों को दान देते हैं

ऐसा माना जाता है कि इस रात की गई इबादत का सवाब हजार महीनों की इबादत से भी ज्यादा मिलता है।

Shab-e-Qadr 2026 : रमज़ान में शब-ए-कद्र क्या है, कब होती है और इस रात की खास अहमियत

क्यों खास मानी जाती है शब-ए-कद्र

इस्लाम में शब-ए-कद्र को रहमत और मगफिरत की रात कहा गया है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं ज्यादा कबूल करता है और फरिश्ते ज़मीन पर उतरते हैं।

इसी वजह से रमज़ान के आखिरी दस दिन मुसलमानों के लिए सबसे ज्यादा अहम माने जाते हैं और लोग इन दिनों में ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की कोशिश करते हैं।

Shabana Parveen

मैं शबाना परवीन हूँ, पेशे से लाइफस्‍टाइल पत्रकार हूं। पत्रकारिता का मुझे कई साल का अनुभव हो चुका है। मुझे करियर, एजुकेशन, बॉलीवुड, सोसाइटी और विमेंस इंस्पिरेशन के साथ ट्रेंडिंग न्यूज पर लिखने में विशेषज्ञता प्राप्‍त है। इन विषयों गहन अध्ययन और इस विषयों के जनकरों से चर्चा कर आप तक सही जानकारी पहुंचा पाती हूं। मैं बतौर संपादक urjanchaltiger.in से जुड़ी हुई हूँ। मै अपनी टीम के साथ आपको हरपल अप-टू-डेट रहने और अपकी लाइफस्‍टाइल को स्‍टाइलिश बनाने के टिप्स बताती रहूँगी। बॉलीवुड, फैशन ब्‍यूटी, ट्रेंडिंग टॉपिक से जुड़ी ताज़ा अपडेट के लिए हमसे जुड़े रहिए। मेल आईडी - editor@urjanchaltiger.in
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