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अब 22 लाख ऊंटों का बनेगा पासपोर्ट, जानिए कहां और क्यों ?

By: अजीत नारायण सिंह

On: Wednesday, February 18, 2026 8:55 AM

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अब 22 लाख ऊंटों का बनेगा पासपोर्ट, जी हां, आपने सही सुना ! यह घोषणा सऊदी अरब के उप पर्यावरण, जल और कृषि मंत्री मनसूर अलमुशैती ने की है। सऊदी अरब ने पारंपरिक पशुधन प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ऊंटों के लिए आधिकारिक “कैमल पासपोर्ट सिस्टम” लॉन्च कर दिया है। यह नई व्यवस्था सऊदी अरब के महत्वाकांक्षी Vision 2030 कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पारंपरिक सेक्टर को तकनीक के माध्यम से अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

सरकार का मानना है कि इस कदम से ऊंटों से जुड़ी पूरी व्यवस्था, जिसमें पहचान, स्वास्थ्य, खरीद-बिक्री और मालिकाना हक शामिल हैं, को एक भरोसेमंद और डिजिटल ढांचे में लाया जा सकेगा। इससे पशुधन क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी या विवाद की संभावनाएं कम होंगी।

ऊंटों की पहचान और स्वास्थ्य रिकॉर्ड अब होगा पूरी तरह सुरक्षित

नए कैमल पासपोर्ट में हर ऊंट की विस्तृत पहचान दर्ज की जाएगी। इसमें माइक्रोचिप नंबर, पासपोर्ट नंबर, नाम, जन्म तिथि, नस्ल, रंग, जन्म स्थान और लिंग जैसी अहम जानकारी शामिल होगी। इसके अलावा ऊंट की दोनों तरफ से ली गई तस्वीरें भी पासपोर्ट का हिस्सा होंगी, जिससे पहचान सुनिश्चित की जा सके।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पासपोर्ट में टीकाकरण और स्वास्थ्य से संबंधित पूरा रिकॉर्ड भी जोड़ा जाएगा। इससे पशुपालन विभाग किसी बीमारी के फैलने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई कर सकेगा और संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।

22 लाख ऊंटों का बनेगा डिजिटल डाटाबेस, व्यापार और प्रबंधन होगा आसान

सरकार इस योजना के तहत देश के लगभग 22 लाख ऊंटों का एक केंद्रीकृत डिजिटल डाटाबेस तैयार कर रही है। इससे ऊंटों की खरीद-बिक्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और मालिकाना हक साबित करना आसान हो जाएगा। यह प्रणाली पशुधन प्रबंधन, निगरानी और नियंत्रण को भी मजबूत बनाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम ऊंट उद्योग में एक बड़ा बदलाव लाएगा। इससे न केवल पशुधन की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि व्यापार को भी नई विश्वसनीयता मिलेगी।

परंपरा और तकनीक का अनूठा संगम, Vision 2030 को मिलेगी नई गति

अरब देशों में ऊंट केवल एक पशु नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. परिवहन, खेती, दूध उत्पादन और व्यापार में ऊंटों की अहम भूमिका है। ऐसे में कैमल पासपोर्ट सिस्टम इस पारंपरिक क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सऊदी सरकार का लक्ष्य इस पहल के माध्यम से पशुधन क्षेत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है। कैमल पासपोर्ट न केवल एक पहचान दस्तावेज होगा, बल्कि यह विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच एक मजबूत पुल भी बनेगा। इससे ऊंट उद्योग अधिक सुरक्षित, संगठित और भविष्य के लिए तैयार हो सकेगा।

Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी की पुष्टि अवश्य करें।

अजीत नारायण सिंह

अजीत नारायण सिंह बतौर पत्रकार सामाजिक विषयों और समसामयिक मुद्दों पर लिखते है। उनका लेखन समाज में जागरूकता लाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर केंद्रित रहता है। वे सरल भाषा और तथ्यपरक शैली के लिए जाने जाते हैं।
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