Ramadan 2026 की शुरुआत भारत में 19 फरवरी से हो गई है। चांद दिखने के बाद देशभर में मुसलमानों ने पहला रोजा रखा और मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की। यह पाक महीना इबादत, सब्र और अल्लाह की रहमत पाने का खास समय माना जाता है।
रोजा रखने से पहले सेहरी की जाती है। सेहरी के समय मुसलमान एक दुआ पढ़ते हैं जिसे सेहरी की दुआ कहते हैं।
सेहरी की दुआ
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ
व बिसौमी ग़दिन नवैतु मिन शहरे रमज़ान
इसका मतलब है । “और मेरा इरादा कल रमज़ान के महीने में रोज़ा रखने का है” यह नियत रोजे की शुरुआत का अहम हिस्सा होता है और इससे रोजा मुकम्मल माना जाता है।

इफ़्तार की दुआ
इफ्तार के समय रोजा खोलते हुए दुआ पढ़ी जाती है, जिसे इफ़्तार की दुआ कहते हैं।
اللهم إني لاكا سومتو و بيكا أمانتو و عليك توكلت و على رزقك أفتارتو
“अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु वा बिका आमन्तु वा अलैका तवक्कलतु वा अला रिज़किका अफ्तर्तु।”
इसका मतलब है कि “मैंने तेरे लिए रोजा रखा और तेरी दी हुई रोजी से इफ्तार किया।” यह दुआ अल्लाह का शुक्र अदा करने का तरीका है।
रमज़ान में रोजा सुबह फज्र से लेकर सूर्यास्त तक रखा जाता है। इस दौरान नमाज, कुरान पढ़ना और जरूरतमंदों की मदद करना सबसे ज्यादा सवाब का काम माना जाता है। यही कारण है कि यह महीना मुसलमानों के लिए सबसे ज्यादा पवित्र माना जाता है।











