Ramadan 2026 भारत सहित दुनिया भर के मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र महीना है, जिसकी शुरुआत चांद दिखने के आधार पर 17 या 18 फरवरी 2026 से होने की संभावना है। यह महीना सिर्फ रोज़ा रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि, सब्र, इबादत और अच्छे आचरण का समय माना जाता है। इस दौरान रोज़ेदार को अपने खानपान, व्यवहार और दिनचर्या में विशेष सावधानी बरतनी होती है।
धार्मिक विद्वानों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रोज़ा सही तरीके से रखने के लिए कुछ जरूरी बातों का पालन करना चाहिए और कुछ चीजों से बचना चाहिए, जिससे रोज़ा भी मुकम्मल हो और सेहत भी सुरक्षित रहे।
Ramadan में क्या करना चाहिए
1. समय पर सेहरी और इफ्तार करना
सेहरी (सुबह का भोजन) रोज़ा रखने की तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें पौष्टिक और हल्का भोजन लेना चाहिए, जैसे फल, दही, दलिया, खजूर और पर्याप्त पानी। इससे दिनभर शरीर में ऊर्जा बनी रहती है।
इफ्तार में भी खजूर और पानी से रोज़ा खोलना सुन्नत माना जाता है, उसके बाद हल्का और संतुलित भोजन करना बेहतर होता है।
2. नमाज़ और इबादत पर विशेष ध्यान देना

रमज़ान को इबादत का महीना कहा जाता है। इस दौरान पांच वक्त की नमाज़ के साथ तरावीह नमाज़ पढ़ना, कुरान की तिलावत करना और अल्लाह की इबादत में अधिक समय देना बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
3. अच्छे व्यवहार और सब्र का पालन करना
इस महीने में गुस्सा, झूठ, चुगली और गलत व्यवहार से बचना जरूरी होता है। रोज़ा सिर्फ भूखे और प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि अपने चरित्र और व्यवहार को बेहतर बनाने का भी समय है।
4. जरूरतमंदों की मदद करना

दान (जकात और सदका) Ramadan का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने से रोज़े का सवाब बढ़ता है और समाज में भाईचारा मजबूत होता है।
Ramadan में क्या नहीं करना चाहिए
1. बिना कारण रोज़ा तोड़ना
जानबूझकर खाना, पीना या रोज़ा तोड़ना इस्लाम में गलत माना जाता है। अगर कोई बीमारी या मजबूरी हो, तो इस्लामी नियमों के अनुसार बाद में कज़ा रोज़ा रखा जा सकता है।
2. तला-भुना और ज्यादा भारी भोजन करना
इफ्तार में ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे गैस, कमजोरी और पाचन से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
3. गलत और अनैतिक कार्य करना
Ramadan में झूठ बोलना, गाली देना, लड़ाई करना और गलत काम करना रोज़े की रूह के खिलाफ माना जाता है। इससे रोज़े का सवाब कम हो सकता है।
4. पानी की कमी को नजरअंदाज करना

सेहरी और इफ्तार के बीच पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। पानी की कमी से डिहाइड्रेशन, कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों के अनुसार, रोज़े के दौरान संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और हल्की शारीरिक गतिविधि जरूरी है। मधुमेह, ब्लड प्रेशर या अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को रोज़ा रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना चाहिए।
Ramadan का असली मकसद
Ramadan आत्मसंयम, आध्यात्मिक विकास और सामाजिक जिम्मेदारी का महीना है। इस दौरान सही नियमों का पालन करके रोज़ा रखने से न सिर्फ धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन भी बेहतर होता है।
Ramadan 2026 में रोज़ेदारों को चाहिए कि वे इस पवित्र महीने को पूरी श्रद्धा, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ बिताएं, ताकि उन्हें इसका पूरा आध्यात्मिक और सामाजिक लाभ मिल सके।











