बैंक ऑफ बड़ौदा पर मध्य प्रदेश सरकार का यू-टर्न, 24 घंटे में पलटा फैसला

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Monday, March 30, 2026 9:47 AM

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मध्य प्रदेश सरकार ने एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में बैंक ऑफ बड़ौदा पर लगाया गया प्रतिबंध महज 24 घंटे के भीतर वापस ले लिया है। इस अचानक लिए गए और फिर उतनी ही तेजी से बदले गए फैसले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निर्णय लेने की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, राज्य के वित्त विभाग ने हाल ही में बैंक ऑफ बड़ौदा को पांच वर्षों के लिए सरकारी लेन-देन से प्रतिबंधित कर दिया था। इस आदेश के तहत बैंक को किसी भी सरकारी विभाग, निगम, मंडल या विश्वविद्यालय से जुड़े वित्तीय कार्य करने से रोक दिया गया था।

सरकार के इस कड़े कदम के पीछे मुख्य कारण बताया गया कि बैंक ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से जुड़े लगभग ₹1,751 करोड़ की राशि के प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती। रिपोर्ट्स के अनुसार, निर्धारित निर्देशों के अनुसार राशि को सही खाते में जमा नहीं किया गया, जिससे प्रशासनिक और वित्तीय नुकसान हुआ।

हालांकि, इस फैसले के जारी होने के कुछ ही घंटों बाद सरकार ने नया आदेश जारी कर प्रतिबंध को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने इस अचानक बदलाव के पीछे कोई स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया है।

यह पूरा घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बैंक ऑफ बड़ौदा देश का एक प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है, जिसके देशभर में हजारों शाखाएं और करोड़ों ग्राहक हैं। ऐसे में किसी राज्य सरकार द्वारा इस तरह का कठोर कदम उठाना और फिर उसे तुरंत वापस लेना नीति निर्माण की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निर्णय निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर में अनिश्चितता पैदा कर सकते हैं। यदि सरकारें बिना स्पष्ट स्पष्टीकरण के फैसले लेती और बदलती हैं, तो इससे वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय और भरोसे पर असर पड़ सकता है।

विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और इसे “प्रशासनिक अस्थिरता” का उदाहरण बताया है। वहीं, आम लोगों और बैंक ग्राहकों के बीच भी इस घटना को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

फिलहाल, प्रतिबंध हटने के बाद बैंक ऑफ बड़ौदा फिर से सामान्य रूप से सरकारी लेन-देन कर सकेगा। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि क्या राज्य सरकार के फैसले पर्याप्त जांच-पड़ताल और ठोस आधार पर लिए जा रहे हैं या नहीं।

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