मकर संक्रांति भारत के सबसे आनंदमय और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर पर्वों में गिनी जाती है। यह त्योहार फसल कटाई के मौसम की शुरुआत, सूर्य के उत्तरायण होने और लंबे, उजले दिनों के आगमन का प्रतीक है। भारत में घरों को रंगोली से सजाया जाता है, तिल-गुड़ की मिठास से वातावरण महक उठता है और परिवार पूजा-पाठ व सामूहिक भोज के लिए अपने घर लौटते हैं।
इसी पावन अवसर पर भारतीय महिलाओं के मन में अक्सर एक सवाल उठता है,क्या मकर संक्रांति पर काली साड़ी पहनना उचित माना जाता है ?
मकर संक्रांति में रंगों का विशेष महत्व क्यों है ?
मकर संक्रांति को प्रकाश, उष्मा और सकारात्मकता का पर्व माना जाता है। इसी कारण पारंपरिक रूप से पीला, नारंगी, हरा, लाल और गुलाबी जैसे चमकीले व ऊर्जावान रंगों को प्राथमिकता दी जाती है। इन रंगों का संबंध माना जाता है
शुभता और सकारात्मक सोच से
समृद्धि और नई शुरुआत से
सूर्य की ऊर्जा और जीवन शक्ति से
इसके विपरीत, काले रंग को लंबे समय से साधारण, गंभीर या दैनिक पहनावे से जोड़ा जाता रहा है। कई पारंपरिक परिवारों में यह रंग उत्सव की भावना से मेल नहीं खाता।
तो क्या मकर संक्रांति पर काली साड़ी पहनना गलत है?
सीधा जवाब है ; नहीं, यह गलत नहीं है,
यह हर परिवार की परंपराओं और मान्यताओं पर निर्भर करता है।परंपरागत रूप से, संक्रांति की पूजा और अनुष्ठानों में चमकीले रंगों को शुभ माना जाता है। ऐसे में काली साड़ी पहनना वर्जित तो नहीं, लेकिन इसे आदर्श विकल्प भी नहीं कहा जा सकता।
यदि आपका परिवार रीति-रिवाजों को लेकर सख्त है, तो बेहतर होगा कि आप पारंपरिक रंगों की साड़ी चुनें। वहीं, आधुनिक सोच वाले परिवारों या अनौपचारिक आयोजनों में काली साड़ी पहन सकती है।
क्या संक्रांति पर काली साड़ी पहन सकते है ?
1. हां, जब परिवार आधुनिक सोच रखता हो
शहरी या युवा परिवारों में रंगों को लेकर कठोर नियम नहीं होते। ऐसे में साधारण काली सूती या हल्की डिजाइन वाली साड़ी पहनी जा सकती है।
2. हां, गैर-धार्मिक या अनौपचारिक आयोजनों में
पतंगबाजी, मित्रों के साथ मिलन या सामुदायिक भोज जैसे कार्यक्रमों में ड्रेस कोड सख्त नहीं होता।
3.हां, सही फेस्टिव स्टाइलिंग के साथ
यदि काली साड़ी को रंगीन ब्लाउज, सोने के गहनों और पारंपरिक एक्सेसरीज़ के साथ संतुलित किया जाए, तो यह लुक भी संक्रांति के अनुरूप बन सकता है।
किन मौकों पर काले रंग से बचना चाहिए?
1. मुख्य पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में
पूजा-पाठ और भोग अर्पण के समय बड़े-बुजुर्ग आमतौर पर शुभ रंगों की अपेक्षा करते हैं।
2. पारंपरिक या रूढ़िवादी परिवारों में
विशेषकर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में फसल पर्वों के दौरान रंगों को लेकर गहरी मान्यताएं होती हैं।
3. बड़े पारिवारिक समारोहों में
जहां बुजुर्गों की उपस्थिति हो और परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाता हो, वहां काले रंग से परहेज करना ही बेहतर माना जाता है।
काली साड़ी पहननी हो, तो कौन-सी स्टाइल चुनें?
आधुनिक परिवारों में संक्रांति के लिए ये काली साड़ियाँ अपेक्षाकृत उपयुक्त मानी जा सकती हैं—
हल्की ज़री बॉर्डर वाली काली रेशमी साड़ी
हथकरघा या पारंपरिक बॉर्डर वाली काली साड़ी
सादे डिजाइन की काली सूती साड़ी (अनौपचारिक अवसरों के लिए)
ध्यान रखें, इन्हें धार्मिक अनुष्ठानों के बजाय सामाजिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रखें।
काली साड़ी को संक्रांति लुक कैसे बनाएं?
सरसों, मैरून या हरे रंग का ब्लाउज पहनें
मंदिर शैली या पारंपरिक सोने के आभूषण चुनें
बिंदी और ताजे फूलों से लुक को संतुलित करें
रंगीन पोटली या दुपट्टा कैरी करें
मेकअप हल्का और प्राकृतिक रखें
संक्रांति के लिए शुभ रंगों के बेहतर विकल्प
यदि आप परंपरा के अनुरूप रहना चाहती हैं, तो ये रंग संक्रांति के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं
- पीला या सरसों
- नारंगी
- गुलाबी
- हरा
- ऑफ-व्हाइट
- लाल या मूंगा











