गर्मी के मौसम में फैशन की दुनिया में एक बार फिर लिनन (Linen) कपड़े तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। हल्के, सांस लेने योग्य और प्राकृतिक गुणों के कारण लिनन अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि मुख्य फैशन ट्रेंड के रूप में उभर चुका है। भारत समेत दुनिया भर में उपभोक्ताओं की पसंद तेजी से बदल रही है और वे अब आराम के साथ-साथ टिकाऊ (sustainable) फैशन की ओर बढ़ रहे हैं।

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वैश्विक लिनन कपड़ा बाजार 2025 में लगभग 0.54 बिलियन डॉलर का था, जो 2035 तक बढ़कर 0.77 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं एक अन्य अध्ययन के मुताबिक, पूरा लिनन मार्केट 2034 तक 1.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो इस सेक्टर में तेज़ वृद्धि को दर्शाता है।

क्यों बढ़ रही है लिनन की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के कारण लोग ऐसे कपड़ों की तलाश में हैं जो शरीर को ठंडक दें। लिनन इस मामले में सबसे बेहतर माना जाता है क्योंकि यह पसीना जल्दी सोखता है और शरीर को ठंडा रखता है।
भारत में भी लिनन की मांग तेजी से बढ़ रही है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में इसका उपयोग समर वियर, शर्ट, कुर्ता और ड्रेसेज में बढ़ा है। इसके अलावा, लगभग 44% से अधिक उपभोक्ता अब प्राकृतिक फाइबर को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे लिनन की लोकप्रियता और बढ़ी है।

फैशन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव
फैशन डिजाइनर्स और ब्रांड्स अब लिनन को केवल पारंपरिक कपड़े के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक स्टाइल के साथ पेश कर रहे हैं। हाल के ट्रेंड्स में लिनन शर्ट, ढीले ट्राउजर, साड़ी और स्कर्ट खासा लोकप्रिय हो रहे हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लिनन से जुड़े सर्च में 1200% तक की वृद्धि देखी गई है, जो इसकी बढ़ती मांग को दर्शाता है।
इसके अलावा, “washed linen” जैसे नए टेक्सचर भी बाजार में आ रहे हैं, जो अधिक सॉफ्ट और पहनने में आसान हैं।

टिकाऊ फैशन की ओर झुकाव
लिनन को पर्यावरण के अनुकूल फैब्रिक माना जाता है क्योंकि इसे बनाने में कॉटन की तुलना में लगभग 60% कम पानी की जरूरत होती है। यही कारण है कि sustainable fashion के बढ़ते ट्रेंड के साथ लिनन की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
स्पष्ट है कि लिनन सिर्फ एक मौसमी ट्रेंड नहीं बल्कि फैशन इंडस्ट्री का भविष्य बनता जा रहा है। आराम, स्टाइल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, इन तीनों का संतुलन लिनन को खास बनाता है। आने वाले वर्षों में इसकी मांग और भी बढ़ने की संभावना है, खासकर भारत जैसे गर्म देशों में।










