इंदौर-पिथमपुर में PNG गैस सप्लाई 55% तक घटी, उद्योगों पर संकट गहराया

By: UTN Hindi ।। Digital Team

On: Saturday, March 28, 2026 1:10 PM

इंदौर-पिथमपुर में PNG गैस सप्लाई 55% तक घटी, उद्योगों पर संकट गहराया
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मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र इंदौर और पिथमपुर में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की आपूर्ति में लगातार कटौती से उद्योगों पर संकट गहराता जा रहा है। ताजा आदेश के अनुसार, औद्योगिक इकाइयों को मिलने वाली गैस सप्लाई को घटाकर औसत खपत के 55% तक सीमित कर दिया गया है, जो पहले 65% थी। यह कटौती 26 मार्च से लागू की गई है।

वैश्विक संकट का असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है, जिससे एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की सप्लाई बाधित हुई है। गैस कंपनियों ने “फोर्स मेजर” का हवाला देते हुए आपूर्ति सीमित कर दी है।

उत्पादन और लागत पर दोहरा दबाव

उद्योग संगठनों का कहना है कि गैस सप्लाई में इस कटौती का सीधा असर उत्पादन क्षमता पर पड़ेगा। जिन उद्योगों में PNG मुख्य ईंधन है, जैसे इंजीनियरिंग, फार्मास्युटिकल, पैकेजिंग और फूड प्रोसेसिंग उन्हें उत्पादन घटाना पड़ सकता है।

यदि कंपनियां तय कोटा से अधिक गैस का उपयोग करती हैं, तो उन्हें स्पॉट एलएनजी खरीदनी पड़ती है, जिसकी कीमत 130 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर से अधिक बताई जा रही है। इससे उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी हो रही है, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए।

इंदौर-पिथमपुर में PNG गैस सप्लाई 55% तक घटी, उद्योगों पर संकट गहराया

उद्योगों में अनिश्चितता

पिथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों का कहना है कि गैस की अनिश्चित आपूर्ति से उत्पादन योजना प्रभावित हो रही है। कई इकाइयों को या तो वैकल्पिक ईंधन अपनाना पड़ रहा है या उत्पादन कम करना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में देरी और बाजार में प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।

पहले भी दिख चुके संकेत

गौरतलब है कि इससे पहले भी गैस सप्लाई 80% से घटाकर 65% की गई थी, और अब इसे और कम करके 55% कर दिया गया है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो कुछ इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।

सरकार से राहत की मांग

उद्योग संगठनों ने राज्य सरकार से वैट में कमी और वैकल्पिक ईंधनों पर राहत देने की मांग की है, ताकि बढ़ती लागत का असर कम किया जा सके। साथ ही, बिजली दरों में हालिया वृद्धि ने उद्योगों की परेशानी और बढ़ा दी है।

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