Eco-friendly clothing : जानिए कैसे इको-फ्रेंडली कपड़े फैशन इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। सस्टेनेबल मटीरियल, जिम्मेदार उत्पादन और पर्यावरणीय जागरूकता से जुड़ी पूरी कहानी।
फैशन में इको-फ्रेंडली कपड़ों का बढ़ता असर
Eco-friendly clothing : इको-फ्रेंडली कपड़ों का विचार 20वीं सदी के आखिर में उभरा। यह दौर था जब लोग पर्यावरण की चिंता को समझने लगे थे। कंज्यूमर और एक्टिविस्ट सस्टेनेबल तरीकों की मांग करने लगे। इसी वजह से फैशन इंडस्ट्री को भी बदलाव की जरूरत महसूस हुई।
फास्ट फैशन के कारण प्रदूषण और कचरे की समस्या बढ़ी। रिपोर्ट्स से लोगों को इसके बुरे असर का पता चला। नतीजा यह रहा कि ग्राहक अब सस्टेनेबल विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।

कंज्यूमर की सोच में बदलाव
एक सर्वे के अनुसार, करीब 60% ग्राहक अब अपने खरीद व्यवहार में बदलाव के लिए तैयार हैं। वे ऐसे कपड़े खरीदना चाहते हैं जो पर्यावरण पर कम असर डालें। इस बदलाव से पता चलता है कि अब फैशन में जागरूकता बढ़ रही है।
आज के लोग सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि सस्टेनेबिलिटी को भी अहम मानते हैं। कपड़ों की खरीद अब एक सामाजिक जिम्मेदारी बनती जा रही है।

सस्टेनेबल ब्रांड्स की भूमिका
कई ब्रांड इस दिशा में आगे आए हैं। पेटागोनिया और एवरलेन जैसी कंपनियां पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से काम करती हैं। वे सस्टेनेबल मटीरियल का उपयोग और सही श्रम प्रथाओं को अपनाकर उदाहरण पेश कर रही हैं।
ये ब्रांड दिखाते हैं कि स्टाइलिश होने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार भी रहा जा सकता है। फैशन और पर्यावरण की यह साझेदारी एक नई सोच को जन्म दे रही है।

सस्टेनेबल प्रैक्टिस और मटीरियल
सस्टेनेबल फैशन का लक्ष्य है कपड़ों के पूरे जीवन चक्र में पर्यावरणीय असर को कम करना। इसमें ऑर्गेनिक फैब्रिक, रीसायकल किए गए मटीरियल और एनर्जी-सेविंग प्रोडक्शन शामिल हैं।
ऑर्गेनिक कॉटन जैसे फैब्रिक बिना हानिकारक केमिकल्स के उगाए जाते हैं। इससे मिट्टी और पानी दोनों को राहत मिलती है। वहीं, रीसायकल मटीरियल से कचरा भी घटता है।

उत्पादन और जीवन चक्र पर ध्यान
फैशन ब्रांड्स अब एथिकल लेबर प्रैक्टिस अपनाने लगे हैं। इसका मतलब है मजदूरों के लिए सही वेतन और सुरक्षित काम का माहौल। साथ ही, कई कंपनियां एनर्जी-एफिशिएंट उत्पादन तकनीक अपना रही हैं ताकि कार्बन फुटप्रिंट घटे।
अच्छी गुणवत्ता वाले कपड़े लंबे समय तक चलते हैं। इससे खरीद की जरूरत कम होती है और कचरा भी घटता है। पुराने कपड़ों को रीसायकल करने के प्रयास भी बढ़ रहे हैं।

सर्कुलर फैशन की ओर बढ़ता कदम
सर्कुलर फैशन का विचार अब नई दिशा दे रहा है। इसका मकसद है कपड़ों को बार-बार इस्तेमाल करना और वेस्ट कम करना। यह तरीका पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य के फायदे
इको-फ्रेंडली कपड़ों से जल और ऊर्जा की खपत घटती है। ऑर्गेनिक कॉटन, आम कॉटन की तुलना में कम पानी लेता है। यह पानी बचाने में मदद करता है। इसके अलावा, ऐसे कपड़ों में हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल कम होता है। इससे त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचता और स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
फैशन अब सिर्फ दिखावे की बात नहीं रही। यह पर्यावरण और जिम्मेदारी के बीच एक संतुलित सोच का प्रतीक बन चुका है।











