दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) से जुड़ा एक गंभीर प्रशासनिक मामला सामने आया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि निगम के एक अधिशासी अभियंता ने 30 जनवरी 2026 को एक ही दिन में इंदौर और आगरा दोनों स्थानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। दोनों शहरों के बीच लगभग 635 किलोमीटर की दूरी है, जिसे तय करने में सामान्य परिस्थितियों में 10 से 14 घंटे तक का समय लगता है। ऐसे में एक ही दिन निरीक्षण और मुख्यालय की उच्चस्तरीय बैठक में भागीदारी का दावा संदिग्ध माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारी को 24 जनवरी 2026 के आदेश के तहत इंदौर स्थित एक फर्म में 600 किलोमीटर एसीएसआर वीज़ल कंडक्टर के निरीक्षण का दायित्व सौंपा गया था। अभिलेखों में उल्लेख है कि 29 और 30 जनवरी को निरीक्षण पूरा कर सामग्री को स्वीकृति और डिस्पैच की अनुमति दी गई। वहीं, 30 जनवरी को ही आगरा मुख्यालय में प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में भी संबंधित अधिकारी की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसकी कार्यवाही 31 जनवरी को जारी की गई।
मामला तब और गंभीर हो गया जब 10 फरवरी 2026 को संयुक्त टीम द्वारा पुनः निरीक्षण में सामग्री में तकनीकी खामी पाई गई। निरीक्षण रिपोर्ट में एल्युमिनियम तार में जोड़ पाया गया, जो निर्धारित भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं था। इस आपत्ति के बाद आगे की प्रक्रिया रोक दी गई। अब तक इस पूरे प्रकरण में किसी स्पष्ट कार्रवाई का अभाव निगम की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज दस्तावेजी त्रुटि है या प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला।











