केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने आज लोकसभा में पेश किए गए बजट 2026 में टैक्स सिस्टम को सरल और करदाताओं के अनुकूल बनाने की दिशा में कई अहम घोषणाएं कीं। लंबे समय से उद्योग जगत और टैक्सपेयर्स द्वारा टैक्स पेनल्टी और प्रॉसिक्यूशन प्रक्रिया को जटिल और डराने वाला बताया जा रहा था। सरकार ने इसे ध्यान में रखते हुए टैक्स पेनल्टी व्यवस्था को तार्किक और पारदर्शी बनाने का फैसला लिया है।
अब असेसमेंट और पेनल्टी एक ही आदेश में
वित्त मंत्री ने बताया कि अब असेसमेंट और पेनल्टी की प्रक्रिया को एक ही आदेश में शामिल किया जाएगा। इससे टैक्सपेयर्स को बार-बार अलग-अलग नोटिस का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मुख्य राहत
- अपील अवधि के दौरान पेनल्टी राशि पर कोई ब्याज नहीं लगेगा
- प्री-डिपॉजिट की सीमा 20% से घटाकर 10% कर दी गई
- यह राशि केवल मुख्य टैक्स डिमांड पर लागू होगी
सरकार का मानना है कि इससे ईमानदार करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी और अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी।
री-असेसमेंट मामलों में भी राहत
बजट 2026 में टैक्स विवादों को कम करने के लिए री-असेसमेंट मामलों में लचीलापन दिया गया है। अब यदि किसी टैक्सपेयर पर पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) शुरू हो चुका है, तब भी वह अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है इसके लिए उसे अतिरिक्त 10% टैक्स देना होगा हालांकि, जानबूझकर गलत जानकारी देने वालों के लिए सख्ती बरकरार रहेगी।

गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने साफ किया है कि जो करदाता जानबूझकर गलत जानकारी देंगे, उन्हें राहत नहीं मिलेगी।
ऐसे मामलों में टैक्स ब्याज के साथ, 100% अतिरिक्त टैक्स देना होगा
इस कदम का उद्देश्य टैक्स चोरी पर रोक लगाना और ईमानदार करदाताओं को सुरक्षित रखना है।
प्रॉसिक्यूशन नियमों में बड़ा बदलाव
बजट 2026 में इनकम टैक्स एक्ट के तहत प्रॉसिक्यूशन को भी तर्कसंगत बनाया गया है। अब इन मामलों में जेल की बजाय जुर्माना लगेगा
- ऑडिट न कराना
- ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट जमा न करना
- फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट में देरी
इसके अलावा बहीखाता न रखने जैसे मामलों को डीक्रिमिनलाइज किया गया
- केवल गंभीर मामलों में ही जेल
- अधिकतम सजा अब 2 साल तक सीमित
क्या है सरकार का मकसद?
सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है
- Ease of Doing Business बढ़ाना
- टैक्स विवाद कम करना
- ईमानदार करदाताओं को सुरक्षा देना
- टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाना
विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव स्टार्टअप्स, MSME और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगे।











