10 साल बाद बड़े पर्दे पर ‘भाभीजी घर पर हैं’, लेकिन फिल्म नहीं चला टीवी वाला जादू

By: Neeraj Sahu

On: Saturday, February 7, 2026 3:20 PM

10 साल बाद बड़े पर्दे पर ‘भाभीजी घर पर हैं’, लेकिन फिल्म नहीं चला टीवी वाला जादू
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टीवी की दुनिया में साल 2015 में शुरू हुआ लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘भाभीजी घर पर हैं’ आज भी दर्शकों की यादों में ताजा है। हल्की-फुल्की कॉमेडी, देसी किरदार और रोजमर्रा की नोकझोंक ने इस शो को घर-घर तक पहुंचाया। यही वजह रही कि करीब एक दशक तक छोटे पर्दे पर राज करने के बाद अब इस शो को फिल्म के रूप में सिनेमाघरों में उतारा गया। हालांकि, बड़े पर्दे पर आते ही कहानी की चमक फीकी पड़ती नजर आती है।

टीवी से फिल्म तक का सफर

इस शो में Aasif Sheikh, Rohitashv Gour, Saumya Tandon और Shilpa Shinde जैसे कलाकारों ने अपने किरदारों से खास पहचान बनाई। वही परिचित पड़ोस, वही दो परिवार और वही हास्यास्पद फ्लर्टिंग वाली कहानी अब फिल्मी फॉर्मेट में दिखाई गई है।

फिल्म का निर्देशन Shashank Bali ने किया है, जबकि पटकथा Raghuvir Shekhawat, शशांक बाली और Sanjay Kohli ने मिलकर लिखी है। टीवी शो से फिल्म बनने की यह कोशिश पहले Khichdi: The Movie के बाद दूसरी बड़ी मिसाल मानी जा रही है।

कहानी में ताजगी की कमी

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कहानी है। वही पुराने मजाक, वही दोहराए गए संवाद और वही पड़ोसी रोमांस। जो चीजें टीवी एपिसोड में मनोरंजक लगती थीं, वही दो घंटे की फिल्म में खिंची-खिंची सी महसूस होती हैं।

कॉमेडी की टाइमिंग कई जगह कमजोर पड़ती है, जिससे दर्शक लगातार हंसने के बजाय कुछ सीन में बोरियत महसूस करते हैं।

कलाकारों ने संभाली कमान

अगर फिल्म कहीं टिकती है तो सिर्फ अपने कलाकारों की वजह से। आसिफ शेख और रोहिताश्व गौर अपने किरदारों में पूरी तरह ढले हुए नजर आते हैं। वर्षों के अनुभव ने उनकी कॉमिक टाइमिंग को और धारदार बना दिया है।

इसके अलावा Ravi Kishan और Mukesh Tiwari जैसे भरोसेमंद कलाकार भी फिल्म में शामिल हैं, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट उनके अभिनय को भी पूरी तरह चमकने का मौका नहीं देती।

सिनेमाघरों में क्यों नहीं जमी बात?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दर्शक इस शो को कभी भी टीवी या मोबाइल पर मुफ्त में देख सकते हैं, तो वे टिकट खरीदकर सिनेमाघर क्यों जाएं?

आजकल जहां बड़े पर्दे पर एक्शन और हाई-वोल्टेज ड्रामा वाली फिल्में दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं, वहां हल्की-फुल्की पारिवारिक कॉमेडी शायद सही समय पर रिलीज नहीं हुई।

‘भाभीजी घर पर हैं’ फिल्म एक ईमानदार कोशिश जरूर है, लेकिन टाइमिंग और ट्रीटमेंट दोनों में चूक जाती है। यह फिल्म टीवी स्क्रीन पर पारिवारिक माहौल में ज्यादा बेहतर लगती, बजाय सिनेमाघर के बड़े कैनवास के।

अगर आप शो के पुराने फैन हैं तो नॉस्टैल्जिया के लिए देख सकते हैं, लेकिन नई कहानी या ताजा कॉमेडी की उम्मीद लेकर जाएंगे तो निराशा हाथ लग सकती है।

Neeraj Sahu

नीरज साहू नागपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। वे एक सक्रिय पत्रकार और समाजसेवी के रूप में पहचाने जाते हैं। नीरज साहू समसामयिक विषयों, राजनीती और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर लिखते हैं।
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