Shaadi.com के संस्थापक और Shark Tank India के जज अनुपम मित्तल ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक अहम बहस को फिर से हवा दे दी है। उन्होंने स्टार्टअप फाउंडर्स के CEO पद छोड़ने को लेकर समाज में बनी धारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह असफलता नहीं, बल्कि परिपक्वता (Maturity) का संकेत है।
LinkedIn पर साझा किए गए एक विस्तृत पोस्ट में अनुपम मित्तल ने कहा कि भारत में अब भी यह सोच प्रचलित है कि Founder ही हमेशा CEO होना चाहिए, जबकि आज के तेज़ी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम में यह सोच पुरानी हो चुकी है।
जो 10 लोगों पर काम करता है, वह 100 पर टूट जाता है – मित्तल
अनुपम मित्तल ने लिखा कि स्टार्टअप्स की ग्रोथ इतनी तेज़ होती है कि कई बार फाउंडर्स खुद उस रफ्तार के साथ मैनेजमेंट स्किल्स में ग्रो नहीं कर पाते।
उनके शब्दों में
“जो मॉडल 10 लोगों की टीम पर काम करता है, वह 100 पर फेल हो जाता है और जो 100 पर चलता है, वह 1000 पर टूट जाता है।”
उन्होंने बताया कि अधिकांश फाउंडर्स 0 से 1 और 1 से 10 की जर्नी में शानदार होते हैं, लेकिन इसके बाद कंपनियों को ऐसे प्रोफेशनल लीडर्स की जरूरत होती है जो स्केलिंग, ऑपरेशंस और कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर ढंग से संभाल सकें।
ग्लोबल ट्रेंड बनाम भारतीय सोच
अनुपम मित्तल ने कहा कि ग्लोबल मार्केट्स में यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जहां फाउंडर्स खुद पीछे हटकर प्रोफेशनल CEOs को जिम्मेदारी सौंपते हैं। इससे:
- कंपनी को मजबूत नेतृत्व मिलता है
- शेयरहोल्डर्स को बेहतर रिटर्न मिलता है
- फाउंडर को स्ट्रैटेजिक रोल में काम करने का मौका मिलता है
लेकिन भारत में इसे अक्सर “निकाल दिया गया”, “फेल हो गया” या “फ्रॉड” जैसे शब्दों से जोड़ा जाता है, जो पूरी तरह गलत है।
Zomato के CEO दीपिंदर गोयल का उदाहरण
अनुपम मित्तल का यह बयान ऐसे समय आया है जब Zomato के CEO दीपिंदर गोयल ने हाल ही में अपने पद से हटने का फैसला लिया। गोयल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय कंपनी के लॉन्ग टर्म ग्रोथ और बेहतर लीडरशिप स्ट्रक्चर के लिए लिया गया है।
इस फैसले के बाद स्टार्टअप जगत में बहस छिड़ गई थी कि क्या फाउंडर्स को CEO पद छोड़ना चाहिए। अनुपम मित्तल का मानना है कि यही सोच भारत के स्टार्टअप्स को ग्लोबल लेवल पर मजबूत बना सकती है।
खुद को रिप्लेसेबल बनाना ही असली सफलता
अपनी पोस्ट के अंत में अनुपम मित्तल ने बेहद अहम बात कही:
“हर फाउंडर का लक्ष्य खुद को रिप्लेसेबल बनाना होना चाहिए।”
उनके मुताबिक, यही सोच Google, Apple और Microsoft जैसी कंपनियों को दशकों तक टिकाऊ बना पाई।











