Chhath Puja : छठ पूजा में उगते हुए सूर्य को क्यों दिया जाता है अर्घ्य ?

Chhath Puja  उगते सूर्य देव को प्रसाद चढ़ाने के साथ आज छठ पूजा (Chhath puja) का समापन हो गया है। वैसे तो प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, लेकिन छठ पूजा में सूर्य देव …

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Chhath Puja  उगते सूर्य देव को प्रसाद चढ़ाने के साथ आज छठ पूजा (Chhath puja) का समापन हो गया है। वैसे तो प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, लेकिन छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है।


Chhath Puja – छठ पूजा में उगते हुए सूर्य को क्यों दिया जाता है अर्घ्य ?

छठ पूजा(Chhath Puja) में डूबते सूरज यानी डूबते सूरज को अर्घ्य दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि शाम के समय सूर्य देव अपनी पत्नी देवी प्रत्यूषा के साथ समय बिताते हैं। इसी कारण शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्य के साथ-साथ देवी प्रत्यूषा की भी पूजा की जाती है। इस तरह व्रत की मनोकामना तुरंत पूरी होती है। यह भी माना जाता है कि सूर्य को अर्घ्य देने  से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। छठ पूजा के अंतिम दिन उगते सूर्य कोअर्घ्य दिया जाता है। इस दिन पूरा परिवार घाट पर पहुंचता है और सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करता है।

Chhath Puja - छठ पूजा @singrauli M.P.
Chhath Puja – छठ पूजा @singrauli M.P.

अर्घ्य में सूर्य देव को जल और दूध का भोग लगाया जाता है। सूर्य पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा देता है। सूर्य को जल चढ़ाने के कई फायदे हैं। ऐसा माना जाता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सूर्य को निडर और निर्भीक ग्रह माना जाता है। इसी आधार पर सूर्य को अर्घ्य देने वाले भक्तों को भी यह गुण प्राप्त होता है। साथ ही राशि चक्र में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। सूर्य को अर्घ्य देने से भी शनि की बुरी नजर का प्रभाव कम होता है। सूर्य देव को अर्ध्य देने से बुद्धि पर प्रभाव पड़ता है और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

Chhath Puja - छठ पूजा
Chhath Puja – छठ पूजा @singrauli M.P.

Chhath Puja – छठ पूजा कब शुरू हुआ ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार छठ महापर्व की शुरुआत महाभारत काल में हुई थी। भगवान सूर्यदेव की कृपा से, कुंती को कर्ण नामक एक तेजस्वी पुत्र मिला था। कर्ण अपनी कमर तक जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्ध्य दिया करते थे। वह प्रतिदिन सूर्य देव की पूजा करता था। ऐसा माना जाता है कि कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्ध्य देने  की प्रथा वहीं से शुरू हुई थी। एक अन्य मान्यता के अनुसार, जब पांडवों ने जुआ खेलने के लिए पूरा महल और राजपाट खो दिया, तो द्रौपदी ने उपवास किया। इस व्रत के पुण्य से उन्हें महल और राजपाट पुनः प्राप्त हुआ।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और डेटा सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। उर्जांचल टाईगर इसकी पुष्टि नहीं करता है।)


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