सिंगरौली जिले के एक छोटे से गांव नौगढ़ भकुआर टोला से आई यह कहानी सिर्फ एक छात्र की नहीं, बल्कि उस संघर्ष की है जो गांवों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की रोजमर्रा की हकीकत बन चुकी है। लंबा पैदल रास्ता, थकान और पढ़ाई के बीच जूझ रहे कक्षा 8वीं के छात्र आशीष कुमार बियार के लिए अब स्कूल का सफर आसान हो गया है।
आशीष हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचता था। घर से स्कूल की दूरी इतनी ज्यादा थी कि उसका असर उसकी पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा था। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि तुरंत साइकिल खरीदी जा सके।
दादा ने नहीं मानी हार
पोते की परेशानी देखकर उसके दादा छोटेलाल बियार ने मदद की उम्मीद में जिला स्तरीय जनसुनवाई का दरवाजा खटखटाया। बुजुर्ग दादा अपनी अर्जी लेकर कलेक्टर श्री गौरव बैनल के सामने पहुंचे और बताया कि आशीष पढ़ना चाहता है, लेकिन रोज का लंबा पैदल सफर उसकी राह मुश्किल बना रहा है।
जनसुनवाई में मौजूद लोगों ने भी बुजुर्ग की बात गंभीरता से सुनी। यह सिर्फ एक आवेदन नहीं था, बल्कि उस परिवार की चिंता थी जो अपने बच्चे को पढ़ाकर बेहतर भविष्य देना चाहता है।
मौके पर ही मिली मदद
कलेक्टर गौरव बैनल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत फैसला लिया। उन्होंने रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से आशीष के लिए नई साइकिल स्वीकृत कर दी। प्रशासन की इस त्वरित पहल से परिवार के चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी।
नई साइकिल मिलने के बाद अब आशीष समय पर स्कूल पहुंच सकेगा। इससे उसका समय बचेगा और पढ़ाई पर ध्यान देना भी आसान होगा। परिवार को उम्मीद है कि अब वह बिना थके नियमित रूप से स्कूल जा पाएगा।
गांव में चर्चा का विषय बनी पहल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई दूरी और संसाधनों की कमी की वजह से प्रभावित होती है। ऐसे में प्रशासन की संवेदनशीलता कई परिवारों के लिए उम्मीद बन जाती है।
गांव के लोगों ने कलेक्टर की इस पहल की सराहना की। उनका मानना है कि छोटी-सी मदद भी किसी बच्चे की पढ़ाई और भविष्य बदल सकती है।






