मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बुधवार को Ministry of Petroleum and Natural Gas ने LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के आवंटन के लिए नई नीति की घोषणा की।
सरकार के अनुसार, इस संशोधित नीति का मुख्य उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण और संवेदनशील उद्योगों को प्राथमिकता के आधार पर LPG की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इनमें फार्मास्युटिकल, फूड प्रोसेसिंग, कृषि, पॉलिमर, पैकेजिंग, पेंट, स्टील, सिरेमिक, ग्लास और एरोसोल जैसे सेक्टर शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि ये सभी क्षेत्र न केवल देश की आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनका सीधा संबंध आम जनता की जरूरतों और रोजमर्रा के जीवन से भी है। उदाहरण के लिए, फार्मा उद्योग दवाइयों के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है, जबकि फूड प्रोसेसिंग और कृषि क्षेत्र खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
आपूर्ति श्रृंखला पर असर कम करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखने को मिल रही है। भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और इस तरह की स्थिति में आपूर्ति बाधित होने का खतरा बना रहता है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी कुल LPG खपत का लगभग 60% आयात करता है। ऐसे में नई नीति के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जरूरी उद्योगों को किसी भी स्थिति में गैस की कमी का सामना न करना पड़े।
उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा
नई नीति के तहत bulk LPG की उपलब्धता को सुव्यवस्थित किया जाएगा, जिससे उत्पादन प्रभावित नहीं होगा। इससे न केवल उद्योगों की लागत नियंत्रित रहेगी, बल्कि रोजगार और उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
विशेष रूप से फार्मा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को इससे तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में LPG का उपयोग उत्पादन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
भविष्य की रणनीति पर फोकस
सरकार का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर भी जोर दे सकता है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके।
कुल मिलाकर, नई LPG आवंटन नीति ऐसे समय में लागू की गई है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। इससे देश के महत्वपूर्ण उद्योगों को स्थिरता मिलने के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।










