भारत में आयोजित हालिया AI Summit 2026 के दौरान Galgotias University के पवेलियन को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने ‘Make in India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। Summit में प्रदर्शित एक Robotic Dog को भारतीय नवाचार के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया था, लेकिन बाद में सामने आई जानकारी और घटनाक्रम ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Summit के दौरान अचानक बंद हुआ पवेलियन, उठे कई सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों और आयोजन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, AI Summit के दौरान Galgotias University के पवेलियन को अचानक बंद करने के निर्देश दिए गए। बताया जा रहा है कि बिजली आपूर्ति रोकने और प्रदर्शन सामग्री को हटाने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद पवेलियन को तत्काल खाली कराया गया। हालांकि आयोजकों या विश्वविद्यालय की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत कारणों की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया और तकनीकी समुदाय में चर्चा तेज हो गई।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर Artificial Intelligence और robotics के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने की कोशिश कर रहा है।
AI Summit 2026: Robotic Dog को लेकर विवाद
विवाद का मुख्य कारण Summit में प्रदर्शित robotic dog की उत्पत्ति को लेकर सामने आए सवाल हैं। तकनीकी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने दावा किया कि यह robotic dog मूल रूप से चीन की एक robotics कंपनी द्वारा निर्मित मॉडल से मेल खाता है। इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि क्या इसे भारत में विकसित नवाचार के रूप में प्रस्तुत किया जाना सही था या नहीं।
हालांकि इस मामले में Galgotias University या संबंधित संस्थाओं की ओर से अब तक कोई विस्तृत तकनीकी स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
‘Make in India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर नई बहस
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर ‘Make in India’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों के वास्तविक स्वरूप को लेकर बहस छेड़ दी है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और robotics जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण components और core technologies के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई है।
AI Summit में हुई यह घटना भारत के तकनीकी इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण सीख के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनने के लिए केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि मूल innovation, research और indigenous development पर अधिक ध्यान देना होगा।











