Ramadan 2026 का महीना इस्लाम में इबादत, सब्र और रहमत का महीना माना जाता है। इस पाक महीने में मुसलमान दिनभर रोज़ा रखते हैं और रात में ख़ास नमाज़ अदा करते हैं, जिसे तरावीह कहा जाता है। तरावीह दरअसल ईशा की नमाज़ के बाद पढ़ी जाने वाली एक खास सुन्नत नमाज़ है, जो सिर्फ रमज़ान के महीने में अदा की जाती है।
इस नमाज़ का मक़सद सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि पूरे महीने में कुरआन-ए-पाक को मुकम्मल सुनना और समझना भी होता है। ज़्यादातर मस्जिदों में हाफ़िज़-ए-कुरआन द्वारा 29 या 30 दिनों में पूरा कुरआन सुनाया जाता है, जिसे “ख़त्म-ए-कुरआन” कहा जाता है।

तरावीह क्यों पढ़ी जाती है?
तरावीह का ताल्लुक़ सीधे तौर पर Ramadan 2026 और कुरआन से है। इस्लामी अक़ीदे के मुताबिक, कुरआन शरीफ़ का नुज़ूल (अवतरण) रमज़ान में हुआ था। इसलिए इस महीने में कुरआन की तिलावत और सुनने की ख़ास अहमियत है।
हदीसों के मुताबिक, पैगंबर हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने रमज़ान की रातों में क़ियाम (रात की नमाज़) पढ़ने की प्रेरणा दी। बाद में यह अमल बाक़ायदा से मस्जिदों में जमाअत के साथ होने लगा। यही नमाज़ आज तरावीह के नाम से जानी जाती है।
तरावीह में कितनी रकअत होती है?
भारत समेत ज़्यादातर मुल्क़ों में तरावीह 20 रकअत पढ़ी जाती है। हालांकि कुछ जगहों पर 8 रकअत भी अदा की जाती है। दोनों ही तरीकों को अलग-अलग इस्लामी मतों में स्वीकार किया गया है।
तरावीह दो-दो रकअत करके पढ़ी जाती है और हर चार रकअत के बाद थोड़ा विराम लिया जाता है। “तरावीह” शब्द अरबी के “राहत” से बना है, जिसका अर्थ है आराम या विराम।

घर में तरावीह पढ़ सकते हैं या नहीं?
अगर कोई शख्स मस्जिद नहीं जा सकता, तो वह घर पर भी तरावीह अदा कर सकता है। महिलाएं आमतौर पर अपने घरों में ही तरावीह पढ़ती हैं। हालांकि जमाअत के साथ मस्जिद में पढ़ने का सवाब ज़्यादा माना जाता है।
तरावीह की फ़ज़ीलत (आध्यात्मिक लाभ )
तरावीह सिर्फ एक नमाज़ नहीं, बल्कि रूहानी ताज्किया (आत्मिक शुद्धि) का ज़रिया है। लगातार 29-30 दिनों तक कुरआन सुनने से इंसान के अंदर सब्र, तौबा और तक़वा के जज़्बात मजबूत होते हैं। यह इबादत मुसलमानों को खुद पर क़ाबू और रूहानी अवेयरनेस सिखाती है।
Ramadan 2026 का असली मकसद केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि अपने सुलूक और किरदार को बेहतर बनाना है। तरावीह इस अमल का अहम हिस्सा है।
तरावीह रमज़ान की खास पहचान है। यह नमाज़ मुसलमानों को कुरआन से जोड़ती है और रूहानी तौर से मजबूत बनाती है। जैसे ही Ramadan 2026 की शुरुआत होगी, देशभर की मस्जिदों में तरावीह की रौनक दिखाई देगी।









