13 फरवरी 2026 को हरियाणा के कैथल में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में राजनीतिक-प्रशासनिक तनातनी का दृश्य सामने आया, जब कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने जमीन बिक्री के धोखाधड़ी मामले में शामिल एक पुलिस कर्मचारी को निलंबित करने का आदेश दिया। मंत्री का निर्देश यह था कि संबंधित पुलिसकर्मी को तुरंत सस्पेंड किया जाए, लेकिन जिला पुलिस अधीक्षक उपासना ने स्पष्ट किया कि उनके पास ऐसे अधिकार नहीं हैं। इससे बैठक के दौरान दोनों के बीच बहस तेज हो गई।
उपासना ने बहस में कहा कि संबंधित पुलिसकर्मी वास्तव में कुरुक्षेत्र जिले में तैनात है, इसलिए उनके पास उसे निलंबित करने का अधिकार नहीं है। इस जवाब से अनिल विज नाराज़ हो गए और उन्होंने कहा कि अगर अधिकार नहीं है तो एसपी उनके नाम से उच्च अधिकारियों को पत्र भेजें, जिससे डीजीपी को निर्देश मिल सकें। बीतते वक़्त में मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि अगर पावर नहीं है तो बैठक छोड़ दी जाए।
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लंबी बहस के बाद एसपी उपासना ने माना कि मंत्री के निर्देश के अनुसार पत्र उच्च अधिकारियों को भेजा जाएगा ताकि पुलिस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। दोनों के बीच यह विवाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ चर्चित हुआ है और प्रशासनिक अधिकारों के दायरे पर सवाल खड़े कर रहा है। बैठक में बिजली निगम के जेई पर भी भ्रष्टाचार के आरोप पर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।











