खजुराहो। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और विश्व धरोहर स्थल खजुराहो में 20 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक 52वां खजुराहो नृत्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा। Khajuraho Festival यह सात दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन भारतीय शास्त्रीय नृत्य, संगीत और पारंपरिक कला का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। (Madhya Pradesh Tourism) राज्य पर्यटन विभाग और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित इस महोत्सव को देश-विदेश से बड़ी संख्या में दर्शक देखने पहुंचते हैं।
मंदिरों की भव्य पृष्ठभूमि में होने वाला यह महोत्सव हर साल भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करता है। Khajuraho Festival में इस बार भी भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और मोहिनीअट्टम जैसे प्रमुख शास्त्रीय नृत्य रूपों की प्रस्तुतियां मंचित की जाएंगी। देश के प्रतिष्ठित और युवा कलाकार एक ही मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे, जिससे दर्शकों को विविधता और परंपरा दोनों का अनुभव मिलेगा।
From the KDF diary of Kunal (Instagram Id – KunalFilms), these are memories of evenings when rhythm slowed time, silence held space, and heritage breathed in every step. Under temple skies, dance became devotion and moments turned timeless.
This February, the story continues at… pic.twitter.com/WEm0cyAPgQ
— Madhya Pradesh Tourism (@MPTourism) February 8, 2026
आयोजकों के अनुसार, नृत्य कार्यक्रमों के साथ-साथ शिल्प बाजार और लोक कला प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जहां हस्तनिर्मित वस्तुएं, पारंपरिक वाद्य यंत्र, वस्त्र और स्मृति चिन्ह उपलब्ध रहेंगे। स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह बाजार विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
खानपान के शौकीनों के लिए भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं। महोत्सव स्थल पर पारंपरिक भारतीय व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें बुंदेली और मध्य प्रदेश की स्थानीय स्वादिष्ट डिशेज शामिल होंगी। इससे पर्यटकों को क्षेत्रीय संस्कृति और स्वाद दोनों का अनुभव मिलेगा।

पर्यटन विभाग ने सुरक्षा, पार्किंग, परिवहन और ठहरने की सुविधाओं को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। खजुराहो एयरपोर्ट, रेलवे और सड़क मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए अतिरिक्त व्यवस्था की जा रही है। होटल और गेस्ट हाउसों में बुकिंग भी तेज हो गई है, जिससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह महोत्सव न केवल कला प्रेमियों के लिए अवसर है, बल्कि यह भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिरों के बीच आयोजित यह कार्यक्रम कला, इतिहास और पर्यटन का अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
जो लोग भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं, उनके लिए 52वां खजुराहो नृत्य महोत्सव एक सुनहरा अवसर साबित होगा।











