Grammy Award 2026 : दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी अवॉर्ड, ऑडियोबुक कैटेगरी में रचा इतिहास

By: Neeraj Sahu

On: Monday, February 2, 2026 1:35 PM

Grammy Award 2026 : दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी अवॉर्ड, ऑडियोबुक कैटेगरी में रचा इतिहास
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बौद्ध धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक गुरु Dalai Lama ने संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार Grammy Awards में पहली बार जीत दर्ज की है। 90 वर्षीय दलाई लामा को यह सम्मान उनकी ऑडियोबुक Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama के लिए “ऑडियोबुक, नैरेशन और स्टोरीटेलिंग” कैटेगरी में दिया गया।

सोमवार को Los Angeles में आयोजित ग्रैमी समारोह में उनके नाम की घोषणा हुई। इस उपलब्धि पर दलाई लामा ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इस सम्मान को व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामूहिक मानवीय जिम्मेदारी की स्वीकृति के रूप में देखते हैं।

“यह पुरस्कार मानवता के साझा मूल्यों की पहचान है”

दलाई लामा ने अपने संदेश में कहा,
“मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। यह किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि हमारी साझा जिम्मेदारी—शांति, करुणा और मानवता की एकता—की पहचान है।”

सरल वस्त्र, चप्पल और गोल चश्मे में दिखने वाले दलाई लामा वैश्विक स्तर पर शांति और अहिंसा के प्रतीक माने जाते हैं। उनका कहना है कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण, करुणा और मानवता की एकता आठ अरब लोगों के सामूहिक कल्याण के लिए अनिवार्य है।

ऑडियोबुक में शामिल रहे अंतरराष्ट्रीय कलाकार

Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama ऑडियोबुक में अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की भागीदारी रही। समारोह में अमेरिकी गायक रूफस वेनराइट ने दलाई लामा की ओर से पुरस्कार स्वीकार किया। इस प्रोजेक्ट में मैगी रोजर्स जैसे कलाकार भी शामिल रहे, जिससे आध्यात्मिक संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिली।

Grammy Award 2026 : दलाई लामा को मिला पहला ग्रैमी अवॉर्ड, ऑडियोबुक कैटेगरी में रचा इतिहास

तिब्बत से निर्वासन तक की कहानी

दलाई लामा महज 23 वर्ष के थे, जब 1959 में Lhasa में हुए विद्रोह को कुचलने के बाद उन्हें जान के खतरे के कारण भारत में शरण लेनी पड़ी। तब से वे निर्वासन में रह रहे हैं और अपने मूल निवास Tibet वापस नहीं लौट सके।

वे तिब्बत के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग करते रहे हैं, जबकि China तिब्बत को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।

उत्तराधिकारी को लेकर विवाद बरकरार

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता दलाई लामा खुद को अभी सक्रिय बताते हैं, लेकिन तिब्बती समुदाय उनके बाद के भविष्य को लेकर तैयारी में जुटा है। तिब्बती बौद्ध मान्यता के अनुसार, वे 1391 में जन्मे आध्यात्मिक गुरु के 14वें पुनर्जन्म हैं।

चीन, जो स्वयं को नास्तिक और कम्युनिस्ट राष्ट्र घोषित करता है, यह दावा करता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को मंजूरी देने का अधिकार उसी के पास होगा। वहीं दलाई लामा स्पष्ट कर चुके हैं कि यह अधिकार केवल उनके भारत स्थित कार्यालय को ही है।

ग्रैमी जीत का व्यापक अर्थ

दलाई लामा की यह ग्रैमी जीत केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि आध्यात्मिक विचार, शांति और करुणा का संदेश आज भी वैश्विक मंच पर प्रासंगिक है। ऑडियोबुक के माध्यम से उनका संदेश नई पीढ़ी तक पहुंचना, इस उपलब्धि को और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

Neeraj Sahu

नीरज साहू नागपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी हैं। वे एक सक्रिय पत्रकार और समाजसेवी के रूप में पहचाने जाते हैं। नीरज साहू समसामयिक विषयों, राजनीती और समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर लिखते हैं।
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