दुनियाभर में अपनी संगीत प्रतिभा के लिए पहचाने जाने वाले ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान ने हाल ही में अपने करियर को लेकर एक भावुक और चौंकाने वाला खुलासा किया है। बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में रहमान ने बताया कि उन्हें बीते करीब आठ वर्षों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में नियमित रूप से काम नहीं मिला है।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उन्हें कभी भी सीधे तौर पर भेदभाव का अनुभव नहीं हुआ, लेकिन इंडस्ट्री में चल रही अंदरूनी प्रक्रियाओं ने जरूर काम के अवसरों को प्रभावित किया।
“काम बांट दिया जाता है, मुझे पता बाद में चलता है”
रहमान ने बातचीत में बताया कि कई बार उन्हें बाद में पता चलता है कि कोई प्रोजेक्ट पहले उनके लिए तय था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनियों ने उसे कई संगीतकारों में बांट दिया।
उन्होंने कहा
“कई बार मुझे यह सुनने को मिलता है कि किसी फिल्म के लिए पहले मुझे बुक किया गया था, लेकिन बाद में म्यूजिक कंपनी ने 4–5 कंपोज़र रख लिए। मुझे इससे कोई शिकायत नहीं है। इससे मुझे अपने परिवार के साथ वक्त बिताने का मौका मिल जाता है।”
रहमान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अब काम के पीछे नहीं भागते।
“मैं काम ढूंढने नहीं जाता। मैं चाहता हूं कि काम मेरी ईमानदारी और मेहनत के कारण खुद मेरे पास आए।”
‘ताल’ से बदली पहचान, लेकिन सफर आसान नहीं था
रहमान ने यह माना कि Roja, Bombay और Dil Se.. जैसी ऐतिहासिक फिल्मों के बाद भी उन्हें लंबे समय तक ऐसा महसूस हुआ कि वे हिंदी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।
उनके अनुसार, फिल्म ‘ताल’ (1999) उनके करियर का टर्निंग पॉइंट थी।इस एल्बम ने उत्तर भारत के श्रोताओं से उन्हें गहराई से जोड़ा।
उन्होंने बताया कि ताल का संगीत इसलिए खास बना क्योंकि उसमें
- पंजाबी बीट्स
- हिंदी मेलोडी
- पहाड़ी लोक संगीत की झलक
शामिल थी, जो आम लोगों के दिल तक पहुंच गई।
भाषा भी बनी बड़ी चुनौती
रहमान ने यह भी माना की हिंदी न जानना उनके लिए एक बड़ी बाधा थी। तमिल पृष्ठभूमि से आने के कारण वे खुद को भावनात्मक रूप से हिंदी से जोड़ नहीं पा रहे थे।
फिल्मकार सुभाष घई ने उन्हें सलाह दी कि अगर उन्हें बॉलीवुड में लंबा सफर तय करना है, तो भाषा सीखनी होगी।
इसके बाद रहमान ने न सिर्फ हिंदी, बल्कि उर्दू भी सीखी, क्योंकि शास्त्रीय हिंदी फिल्म संगीत की जड़ें उर्दू में हैं।
यहीं से उनका सफर आगे बढ़ा
- अरबी भाषा सीखी
- पंजाबी संगीत में रुचि बढ़ी
- और यहीं से हुई सुखविंदर सिंह के साथ ऐतिहासिक जुगलबंदी
‘छैंया छैंया’ से ‘जय हो’ तक का सफर
सुखविंदर सिंह के साथ रहमान की जोड़ी ने कई ऐतिहासिक गीत दिए
- छैंया छैंया – दिल से
- रमता जोगी – ताल
- जय हो – स्लमडॉग मिलियनेयर
फिल्म ताल का पूरा एल्बम ताल से ताल, नहीं सामने तू, इश्क़ बिना आज भी भारतीय संगीत का स्वर्णिम अध्याय माना जाता है।
अब ‘रामायण’ पर फोकस
फिलहाल ए.आर. रहमान अपना पूरा ध्यान रणबीर कपूर स्टारर ‘रामायण’ पर लगा रहे हैं, जिसमें साईं पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।











