सिंगरौली। डिजिटाइजेशन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते हुए एनटीपीसी विंध्याचल ने इन-हाउस विकसित ऑनलाइन प्रोटेक्शन/परमिसिव बायपास मैनेजमेंट सिस्टम (PBMS) ‘स्वीकृति’ का पायलट आधार पर शुभारंभ किया। यह पहल विद्युत संयंत्र संचालन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ‘स्वीकृति’ प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ श्री पार्थ नाग, मुख्य महाप्रबंधक (ओएस) द्वारा श्री संजीब कुमार साहा, परियोजना प्रमुख (विंध्याचल) की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया।
अब प्रोटेक्शन और परमिसिव बायपास की प्रक्रिया सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी। एनटीपीसी विंध्याचल ने डिजिटल नवाचार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए इन-हाउस विकसित ऑनलाइन प्रणाली ‘स्वीकृति’ का पायलट शुभारंभ किया है, जो विद्युत संयंत्र संचालन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और डेटा-आधारित बनाएगी। इस प्रणाली का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक (ओएस) श्री पार्थ नाग द्वारा परियोजना प्रमुख श्री संजीब कुमार साहा की उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि एनटीपीसी अब केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं, बल्कि डिजिटल उत्कृष्टता की ओर भी तेज़ी से अग्रसर है। वर्चुअल संबोधन में श्री पार्थ नाग ने कहा कि आधुनिक ऊर्जा संयंत्रों में डिजिटल और सुरक्षा-केंद्रित सिस्टम भविष्य की आवश्यकता हैं। वहीं महाप्रबंधक श्री ए. जे. राजकुमार ने ‘स्वीकृति’ को परिचालन चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान बताया। परियोजना प्रमुख श्री साहा ने इसे डेटा एनालिटिक्स आधारित निर्णय प्रक्रिया की मजबूत नींव करार दिया। ऑनलाइन प्रोटेक्शन/परमिसिव बायपास मैनेजमेंट सिस्टम ‘स्वीकृति’ न केवल प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है, बल्कि कॉर्पोरेट दिशानिर्देशों के अनुरूप पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और सुरक्षा मानकों को भी सुदृढ़ करता है। स्वचालित अलर्ट और बेहतर पर्यवेक्षण नियंत्रण इसे एक आधुनिक सुरक्षा प्रणाली बनाते हैं। पायलट चरण में सफल परीक्षण के बाद इस प्रणाली को एनटीपीसी के अन्य स्टेशनों में लागू किए जाने की योजना है। इसके साथ ही विंध्याचल स्टेशन देश का पहला ऐसा एनटीपीसी संयंत्र बन गया है, जहां प्रोटेक्शन एवं परमिसिव बायपास की पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड डिजिटल हो चुकी है। ‘स्वीकृति’ किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक टीम की उपलब्धि है। इसका नेतृत्व श्री सुमन कुमार सिंह ने किया, जिनके साथ आईटी और प्रचालन टीम के अधिकारियों ने मिलकर इसे साकार रूप दिया।










