भुवनेश्वर, बुधवार, 20 अगस्त 2025 : भारत ने ओडिशा के चांदीपुर से Agni-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस परीक्षण को बुधवार को सुबह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) तथा स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड की देखरेख में पूरा किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि लॉन्च ने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सत्यापित किया। परीक्षण पूरी तरह से सफल रहा।
Agni-5 : अग्नि-5 का महत्व
अग्नि-5 भारत की स्वदेशी विकसित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल भारत की सामरिक ताकत का मुख्य हिस्सा मानी जाती है।
परीक्षण की गई मिसाइल का यह संस्करण उन्नत तकनीक से लैस था। यह देश की दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
पिछला परीक्षण और MIRV तकनीक
इससे पहले 11 मार्च 2024 को Agni-5 का परीक्षण किया गया था। तब DRDO ने पहली बार इसमें MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicle) तकनीक का इस्तेमाल किया था।इस तकनीक से एक ही मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यों पर प्रहार कर सकती है। यह भारत के लिए एक बड़ी सैन्य उपलब्धि थी।
इस बार का परीक्षण भी उसी श्रेणी में अगला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत बनाता है।
परीक्षण स्थल और प्रक्रिया
परीक्षण ओडिशा के तट पर स्थित इंटिग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), चांदीपुर से किया गया। मिसाइल हवा में छोड़े जाने के बाद अपने सभी चरणों में सफल रही। सभी सेंसर और ट्रैकिंग उपकरणों ने इसके प्रदर्शन को रिकॉर्ड किया।
मंत्रालय ने कहा कि यह परीक्षण भारत की रणनीतिक तैयारी और तकनीकी क्षमता दोनों को दर्शाता है।
सामरिक महत्व
अग्नि-5 का परीक्षण केवल तकनीकी सफलता नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। भारत ने यह दिखाया है कि उसकी रक्षा प्रणाली क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि MIRV तकनीक के साथ Agni-5 एशिया में शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकती है। यह तकनीक बहुत कम देशों के पास है। भारत अब उन देशों की सूची में शामिल है।











